
बंजार (कुल्लू)। ट्राउट मछली के लिए विख्यात बंजार की तीर्थन नदी में विभाग द्वारा निर्माणाधीन मत्स्य फार्म पिछले नौ वर्षों बाद भी नहीं बन सका है। इससे सबसे ज्यादा धक्का घाटी के पर्यटन को लगा है। बंजार की तीर्थन नदी मछली आखेट के लिए सूबे में ही नहीं, बल्कि विश्वभर में विख्यात है, लेकिन हैरान की बात है कि पैसे मंजूर होने पर भी यहां मत्स्य फार्म नहीं बन पाया है। इस कारण मछली आखेट के जुडे़ पर्यटन व्यवसायी भी परेशान व निराश हैं। 2005 में तीर्थन में आई भयंकर बाढ़ में पूर्व स्थापित मत्स्य फार्म तबाह हो गया था। ऐसे में तत्कालीन पशुपालन मंत्री हर्ष महाजन ने मत्स्य फार्म को दोबारा बनाने के लिए 2.32 करोड़ की राशि जारी की थी और इस फार्म के पुनर्निर्माण के आदेश दिए थे, लेकिन नौ साल बीतने पर भी यह मत्स्य फार्म पूरा नहीं हो सका है। इससे यहां के पर्यटन व्यवसाय को भी धक्का लगा है। इस वजह से यहां ट्राउट का उत्पादन भी खतरे में पड़ गया है। पर्यटन व्यवसायी दौलत भारती, हेत राम, राजेंद्र सिंह, राजू तथा मोहर सिंह ने कहा कि बंजार की तीर्थन नदी में बाढ़ से बह गया मत्स्य फार्म के पुन: न बनने से पर्यटन को काफी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मछली आखेट के लिए यहां सालाना हजारों देशी-विदेशी सैलानी आते हैं।
उन्होंने सरकार व विभाग से जल्द इस फार्म को बनाने की मांग की है। उधर, मत्स्य विभाग कुल्लू के उपनिदेशक सतपाल मेहता ने कहा कि फार्म का निर्माण कार्य हिमुडा को दिया गया है। विभाग ने हिमुडा को दो करोड़ की राशि जारी कर दी है, जबकि बाकी राशि काम पूरा होने पर जारी की जाएगी।
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हिमुडा के एक्सईएन डीके टंडन ने बताया कि मत्स्य विभाग से नागणी फिश फार्म के लिए पैसा आया है व कुछ अभी आना बाकी है। मौके पर जाकर इसका जायजा लिया जाएगा।
