
नोएडा। नोएडा पुलिस को अचानक उर्दू की सुध आ गई है। थानों के अंदर नेम प्लेट से लेकर बाहर गेट पर लगने वाले थाने के बोर्ड तक में इस भाषा का इस्तेमाल शुरू हो गया है। उर्दू को द्वितीय भाषा का दर्जा देते हुए पिछली सरकार ने सर्कुलर जारी किया था।
थाना सेक्टर-39 के मेन गेट पर हिंदी, अंग्रेजी के अलावा उर्दू में भी थाना सेक्टर-39 नोएडा लिखा गया है। वहीं, थाने के अंदर भी नेम प्लेट से लेकर कार्यालय तक के बोर्ड पर इस भाषा को स्थान दिया गया है। शहर के अन्य थानों में भी उर्दू में नाम, पदनाम लिखने की तैयारी है। थाना प्रभारियों के मुताबिक पिछले दिनों शासन से एक आदेश आया है। जिसमें थानों के गेट पर लगे बोर्ड, थानाध्यक्ष का नाम, अधिकारियों के नाम, थाना कार्यालय व हवालात को उर्दू में भी लिखा जाएगा।
बसपा कार्यकाल में पास हुआ था आदेश
थानों व जिला प्रशासन के कार्यालयों में हिंदी के साथ साथ उर्दू भाषा का प्रयोग करने के आदेश बसपा कार्यकाल में चार साल पहले हुए थे। जिसका पालन उस दौरान जिला प्रशासन के दफ्तरों में होता दिखाई दिया था लेकिन एक दो थानों के अलावा शहर के थानों में इसका पालन नहीं हो सका था। पुराने सर्कुलर को दुबारा लागू करने के आदेश दिए गए हैं लेकिन इस बार आदेशों का पालन से सख्ती से कराने के लिए अधिकारियों को कहा गया है।
अंग्रेजों के जमाने से हो रहा इस्तेमाल
रिटायर्ड पुलिस अधिकारी के के गौतम के मुताबिक अंग्रेजाें के जमाने से पुलिस व प्रशासन के कार्यालयों में उर्दू का इस्तेमाल होता रहा है। थाना बिसरख के दस्तावेज में उर्दू में लिखी गई एफआईआर से लेकर जेनरल डायरी (जीडी) तक मौजूद हैं। आज भी थानों में लिखी जाने वाली जीडी व केस डायरी में उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है। समय केसाथ-साथ उर्दू के स्थान पर अंग्रेजी का चलन बढ़ गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उर्दू से किनारा करना शुरू कर दिया। पिछली सपा सरकार में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए थानों में उर्दू अनुवादक की नियुक्ति भी की गई थी, लेकिन थानों में उर्दू अनुवादकाें को अन्य कार्याें में लगा दिया गया।
उर्दू भाषी पेंटर की तलाश
शासन के आदेश के बाद थानों में उर्दू में नाम, पदनाम व बोर्डों पर उर्दू लिखने के लिए पेंटर की तलाश शुरू हो गई है। शहर में उर्दू के जानकार तो हैं लेकिन पेंटर बहुत कम हैं। ऐसे में गाजियाबाद व दिल्ली के कुछ पेंटरों से भी थाना प्रभारियों ने अपने मातहत चौकी प्रभारियों व सिपाही के माध्यम से सम्पर्क किया है।
थानों में उर्दू में भी नाम, पदनाम लिखे जाने का सर्कुलर शासन से आया है, जिसका पालन कराया जा रहा है। जिन थानों में इसका अभी तक पालन नहीं किया गया है, उन थाना प्रभारियों को आदेशों का पालन जल्द करने के लिए कहा गया है। -डा. प्रितिन्दर सिंह एसएसपी
