नेहरू की ड्रीम सिटी की ढह गई विरासत

चंडीगढ़: चंडीगढ़, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की ड्रीम सिटी। शहर की प्लैनिंग में नेहरू का सबसे अहम योगदान था, बदले में चंडीगढ़ प्रशासन ने भी नेहरू के 100वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में शहर का पहला बोटेनिकल गार्डन (वनस्पति उपवन) उन्हें समर्पित किया। यही वजह है कि इस गार्डन को स्मृति उपवन भी कहा जाता है। इसे और भी अहमियत देने के लिए प्रशासन द्वारा गार्डन को हैरिटेज का दर्जा भी दिया जा चुका है लेकिन समय बीतने के साथ ही प्रशासन शहर की इस विरासत को भूल गया।

अब आलम यह है कि खूब खर्चा करके बनाया गया यह बोटेनिकल गार्डन धीरे-धीरे खत्म होने के कगार तक पहुंच गया। 14 नवम्बर, 1988 के दिन पूरा देश नेहरू का 100वां जन्मदिवस सैलीब्रेट कर रहा था, उसी दिन कैपिटल काम्पलैक्स और सुखना लेक के बीच में बने इस गार्डन का उद्घाटन चंडीगढ़ प्रशासक सिद्धार्थ शंकर राय ने किया था।

मगर अब यह गार्डन प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में कोई मायने नहीं रखता, न ही प्रशासन ने इस गार्डन को प्रोमोट करने के लिए आज तक कोई कदम उठाए। यही वजह है कि शहर के बहुत कम लोग होंगे जिन्हें इस गार्डन के बारे में जानकारी होगी। उठाना पड़ सकता है रिस्क गार्डन में बने तालाब के आसपास सांभर और मोर का झुंड रहता है लेकिन उन्हें देखने वाले पर्यटक नहीं आते। कारण, तालाब के आसपास दलदल जैसी स्थिति है। गार्डन में बना ब्रिज भी जर्जर हालत में है। उसके नीचे बह रहा पानी भी दलदली हो चुका है।

खास पहलू

गार्डन को बनाने में प्रशासक के सलाहकार अशोक प्रधान का दिमाग था। गार्डन का ले आऊट चीफ आर्कीटैक्ट ओ.पी. मेहता ने तैयार किया था। चीफ इंजीनियर एस.एस. विरदी ने भी अपना पूरा सहयोग दिया था।

दूसरे पर खर्चे लाखों

जो बोटेनिकल गार्डन शहर की धरोहर हैं और जिसे पर्यटन स्थल के तौर पर प्रशासन प्रोमोट कर सकता था वह तो अपने अंतिम दिन गिन रहा है लेकिन दूसरी ओर प्रशासन ने सारंगपुर में एक अन्य बोटेनिकल गार्डन पर लाखों रुपए पानी की तरह बहा दिए।

176 एकड़ में बने इस नए गार्डन का उद्घाटन 2007 में तत्कालीन प्रशासक जे.एफ.आर. जैकब ने किया था। इस नए गार्डन के उद्घाटन के बाद तो प्रशासन ने सबसे पहले बोटेनिकल गार्डन की ओर रुख करना ही बंद कर दिया।

सीवरेज बन रहा परेशानी

बोटेनिकल गार्डन में कई सालों से पंजाब का सीवरेज पानी बहकर इकट्ठा हो रहा है। यही वजह है कि इस पानी की सीलन धीरे-धीरे गार्डन को नष्ट कर रही है। कुछ दिन पहले सीलन की वजह से गार्डन की पहचान बन चुका एक स्मृति चिन्ह ढह गया।

प्रशासनिक अधिकारियों का भी कहना है कि इस स्मृति चिन्ह को किसी ने तोड़ा नहीं है, बल्कि वहां इकट्ठा हो चुके सीवरेज के पानी ने इसे बर्बाद कर दिया।

बैठते हैं नशेड़ी

प्रशासन ने यह गार्डन इसलिए बनाया था, ताकि सुखना लेक और रॉक गार्डन के बीच में पर्यटकों को प्रकृति के बीच कुछ पल इतमिनान से गुजारने को मिलें लेकिन अब यह पूरी तरह से जंगल में बदल चुका है और हर समय यहां पर नशेडिय़ों का हुजूम जमा रहता है।

नशे के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सामान यहां की शोभा बढ़ा रहा है। पुलिसकर्मी भी बाहर से गश्त लगाकर चले जाते हैं लेकिन कोई इस गार्डन के बीच जाकर यह देखने की जहमत नहीं उठाता है कि वहां किस कदर इस हैरिटेज का दुरुपयोग किया जा रहा है।

साइंस एंड टैक्नोलॉजी एन्वायरमैंट के डायरैक्टर संतोष कुमार का कहना है कि पंजाब से आने वाला सीवरेज का पानी गार्डन की मुख्य परेशानी है। पंजाब को बार-बार लैटर भेजा मगर हमें कोई जवाब नहीं मिला। हम भी चाहते हैं कि इसे पूरी तरह से ठीक किया जाए, मगर जब तक सीवरेज का पानी आता रहेगा, हम कुछ नहीं कर पाएंगे। सोमवार को चैक करवाऊंगा कि वहां क्या स्थिति है।

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