
कांगड़ (ऊना)। स्वां चैनेलाइजेशन परियोजना के शिलान्यास मौके पर मुख्यमंत्री तथा कांग्रेस के अन्य नेताओं ने हालांकि दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी को याद नहीं किया। लेकिन भीड़ में कई लोगों को राजीव गांधी याद आए। 1988 में जब स्वां नदी में आई भीषण बाढ़ ने ऊना में तबाही मचाई थी तो राजीव गांधी तबाही का मंजर देख हैरान रह गए थे। उन्होंने भी इलाका वासियों को भरोसा दिया था कि इस समस्या का पुख्ता हल किया जाएगा।
पंडाल में बैठे हरोली के 86 वर्षीय हुक्म सिंह, 77 वर्षीय शंकर दास, 68 वर्षीय भोला दत्त और 71 वर्षीय केवल कृष्ण ने कहा कि 1988 में राजीव गांधी काफी देर तक तबाही के मंजर को निहारते रहे। इन लोगों ने कहा कि राजीव गांधी ने उस समय कहा था कि आने वाले समय में यह नदी और नुकसान कर सकती है। इसका हल तलाशने का उन्होंने लोगाें को आश्वासन दिया था। बाढ़ के कारण गगरेट से संतोषगढ़ और घालूवाल तथा अन्य क्षेत्रों में तबाही मची थी। कई आशियाने और कृषि योग्य भूमि का नामोनिशान मिट गया था।
सीएम के सामने निकाली भड़ास
मुख्यमंत्री की जनसभा में कइयाें ने भड़ास निकालते हुए शब्द बाण भी दागे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं गगरेट के विधायक राकेश कालिया ने तो यहां तक कह दिया कि मैं इन दिनों मध्यप्रदेश में हूं और ज्यादातर दूसरे राज्यों के दौरों पर रहता हूं। ऐसे में खाली खेत देखकर आवारा पशु वहां घुस जाते हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कुछ लोग अपने फोटो खिंचवाकर अपने आप को गगरेट हलके का सर्वेसर्वा साबित करने में लगे हैं। यह लोग किसी के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम इस परियोजना का शिलान्यास गगरेट में करवाना चाहते थे लेकिन उद्योग मंत्री गुम कबड्डी खेल गए। फ्लड कंट्रोल के लिए डिवीजन अक्षम है। इंजीनियर इन चीफ गगरेट में बिठाया जाए। सत्तापक्ष के विधायकों के क्षेत्रों में सड़कों को ठीक कराया जाना चाहिए। कई श्रद्धालु चिंतपूर्णी आते हैं, गगरेट-चिंतपूर्णी की सड़कें बेहद खराब हैं।
सीएम का चेहरा देखा जाता है
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि कई बड़ी परियोजनाओं में प्राइवेट भागीदारी के बाद परियोजना की स्थापना को केंद्र से राशि मिलती है। कोई निजी फर्म यह राशि मेरा चेहरा, कुलदीप कुमार का चेहरा या राकेश कालिया का चेहरा देखकर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री का चेहरा देखकर जारी करेगी।
सरकार मेरे हलके का ध्यान रखना : कालिया
राकेश कालिया ने मंच से मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मेरे हलके का आप ध्यान रखना। कहा कि मैं आपके आदेशों से दिल्ली गया हूं और संगठन के कार्यों में व्यस्त हूं। ऐसे में पूरी तरह से अपने हलके की जनता का दुख दर्द नहीं बांट पा रहा हूं।
