
शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा शुक्रवार को पेश बजट में निवेश को खींचने की जुगत नजर आई है। कर्मचारियों, पेंशनरोें के हित पर अधिक केंद्रित रहे इस बजट में उद्योगपतियों और निवेशकों को आमंत्रित करने का पूरा प्रयास दिखा। एक साल की हुई इस वीरभद्र सरकार ने स्वास्थ्य, बागवानी जैसे हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण कई क्षेत्रों में निवेश की नई राह सुझाई है।
उद्योगपति अरसे से बिजली शुल्क को कम करने की मांग उठाए हुए थे। सरकार ने इसे 15 और 17 फीसदी से कुछ शर्तों को जोड़कर दो फीसदी तक घटाने का निर्णय कर इसे मान लिया। इससे उद्योगों का पलायन रुकेगा। नए उद्योग हिमाचल में निवेश में दिलचस्पी दिखाएंगे। बजट घोषणा के मुताबिक नए निवेश के लिए हिमाचल मेें निवेश प्रोत्साहन प्रकोष्ठ गठित होगा और औद्योगिक विकास के लिए उद्योग परामर्श परिषद बनेगी। पंडोगा, कंदरोड़ी के बाद नए अत्याधुनिक क्षेत्रों को विकसित करने का संकल्प भी लिया गया है। इसके अलावा स्टांप शुल्क को नए उद्योगों से केवल 50 प्रतिशत लेना और नए उद्योगों के लिए भी भूमि प्रयोग के हस्तांतरण को वर्तमान दर से 50 प्रतिशत घटाने की भी अलग पहल है। स्वास्थ्य क्षेत्र में गांवों में अस्पताल खोलने और कृषि-बागवानी क्षेत्र में सीए स्टोर स्थापित करने पर निजी क्षेत्र को एक रुपये लीज पर सरकारी जमीन देेना का निर्णय भी निवेशकों को आकर्षित करेगा। राज्य के स्वास्थ्य के अलावा लोक निर्माण, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य, शहरी विकास, पर्यटन और परिवहन विभागों में सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) सेल स्थापित करने का फैसला भी अलग आकर्षण प्रयोग है। निवेशकों का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि सरकार सुनियोजित औद्योगिक विकास को प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार ने सीमित साधनों के बावजूद बेहतरीन कार्य करने का बीड़ा उठाया है।
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एक साथ तीन हेल्पलाइन
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक साथ तीन हेल्पलाइन का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के मामलाें की जानकारी देने के लिए टोल फ्री टेलीफोन नंबर सुविधा प्रदान की जाएगी। एलपीजी उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाने के लिए एक टोल-फ्र ी नंबर शुरू किया जाएगा। इसके अलावा जन सेवा डिलीवरी हेल्पलाइन बनेगी, जहां सभी विभागों की शिकायत की जा सकेगी।
