
नई दिल्ली। करोड़ो रुपये के स्टॉक गुरु घोटाला मामले में अदालत ने सात निवेशकों को स्टॉक गुरु कंपनी और उसके संस्थापक लोकेश्वर देव उर्फ उल्लास प्रभाकर व उसकी पत्नी से 12 लाख रुपये वसूल करने का अधिकार दिया है। लेकिन अदालत ने निवेशकों की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने आयकर विभाग को आरोपी से 2011 में बरामद 17 करोड़ रुपये जारी न करने का निर्देश देने की मांग की थी।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त जिला जज अनिल कुमार सिसौदिया ने अपने निर्देश में कहा कि आयकर विभाग संबंधित कानून के तहत काम करता है और स्वायत्त संस्था होने के चलते उसे एक खास तरीके से काम करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। हालांकि अदालत ने निवेशकों को अपनी मांग आयकर विभाग के समक्ष रखने की छूट दी है। अदालत का यह आदेश सात निवेशकों अंकुर श्रीवास्तव, मुकुल, हनी कुमार, ओमप्रकाश, सविता शर्मा, कांता शर्मा और सरोज बाला द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई के दौरान आया है। निवेशकों का आरोप है कि उल्लास प्रभाकर, उसकी पत्नी रक्षा उर्फ प्रियंका सारस्वत, उनके प्रतिनिधि वीके तुलसियान, संजय गुप्ता व उर्मिला सैनी ने उनके साथ धोखाधड़ी और साजिश कर उनके लाखों रुपये का गबन किया। इन लोगों के कहने पर निवेशकों ने 12 लाख रुपये स्टॉक गुरु में निवेश किया था। लेकिन कुछ समय बाद ही निवेशकों को पता चल गया था कि कंपनी पर आयकर विभाग की नजर है और यह आरबीआई व सेबी के साथ पंजीकृत नहीं है। इसके बाद निवेशकों ने 2011 में स्टॉक गुरु के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने उल्लास व उसकी पत्नी रक्षा को 10 नवंबर 2012 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी से गिरफ्तार किया था।
