नाशपाती के दाम 50 फीसदी लुढ़के

खराहल (कुल्लू)। एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर दिल्ली सब्जी मंडी के अलावा
चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल की मंडियों में नाशपाती की कीमतों में भारी गिरावट आई है। दस दिनों से जारी गिरावट अब पचास फीसदी तक पहुंच गई। इससे बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
800 से 900 रुपये के बीच बिक रहा नाशपाती का डब्बा अब 450 से 550 रुपये में बिकने लगा है। बदहाल सड़कों, भाड़े में वृद्धि, उत्तराखंड में आई बाढ़ और अच्छी फसल इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि मई माह में सूखे की चपेट के कारण तीस फीसदी नाशपाती फलों की ड्रापिंग भी हुई थी। ऐसे में उत्पादन में थोड़ी गिरावट आने की आशंका थी लेकिन फिर भी नाशपाती के उम्दा दाम बागवानों को नहीं मिल रहे हैं। विभिन्न मंडियों में नाशपाती की आमद बढ़ गई है। इससे आपूर्ति बढ़ गई है और मांग घट गई।
कुल्लू की स्थानीय मंडियों में 15 से 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही नाशपाती अब 5-25 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। जिला कुल्लू में सबसे कम उत्पादन वर्ष 2001-02 में 894 मीट्रिक टन रहा था। सबसे ज्यादा उत्पादन वर्ष 2007 में 17344 मीट्रिक टन हुआ था। जिला में हर साल 8 से 10 लाख पेटी के करीब नाशपाती का उत्पादन होता है।
घाटी के बागवान चमन ठाकुर, दोत राम, गिरधारी लाल, लाल चंद, अशोक ठाकुर, श्याम और जय चंद का कहना है कि एकाएक कीमत गिरने से भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में दवाइयों और खाद का खर्चा भी पूरा होना असंभव लग रहा है। दिल्ली आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन छावड़ा का कहना है कि मंडियों में नाशपाती की आमद बढ़ने से कीमत में गिरावट आई है। 450 से 500 रुपये की दर से डब्बा बिक रहा है। कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति कृषि उपज विपणन समिति के सचिव प्रकाश कश्यप ने बताया कि कुल्लू में नाशपाती 5 से 23 रुपये प्रति किलो, की भुंतर में 5-26 रुपये किलो, बंदरोल में 4 से 30 रुपये प्रतिकिलो के बीच बिक रही है।

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