नसबंदी कर जंगल में नहीं छोड़े जाएंगे बंदर

चंबा। अब बंदरों को नसबंदी के बाद दोबारा जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी के निर्देशानुसार वन विभाग ने जिला चंबा में वानर वाटिका बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए विभाग ने लगभग 70 लाख रुपये का एक प्रोजेक्ट तैयार कर लिया है। इसका प्रस्ताव तैयार कर वाइल्ड लाइफ के प्रधान मुख्य अरण्यपाल के माध्यम से भारत सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के तारा देवी के बाद यहां दूसरी वानर वाटिका तैयार की जाएगी। वन विभाग की ओर से जो प्रोजेक्ट तैयार किया गया है, उसके मुताबिक वानर वाटिका में लगभग पांच हजार बंदरों को रखने की क्षमता होगी। यह वानर वाटिका लगभग पांच हेक्टेयर जमीन पर तैयार होगी। विभाग ने इस वाटिका के लिए तीन स्थानों को चिन्हित किया है। इसमें सरोल डीपीएफ के तहत बंदर नसबंदी केंद्र सरोल के पास खाली पड़ी जमीन के अलावा छह किलोमीटर दूर स्थित स्थान पर भी इस वाटिका का निर्माण किया जा सकता है। इसके अलावा नसबंदी केंद्र से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित कियाणी बीट में पुखरी के पास भी एक ऐसा स्थान है, जहां पर वानर वाटिका का निर्माण प्रस्तावित है। वन विभाग के मुख्य अरण्यपाल एआरएम रेड्डी ने बताया कि वानर वाटिका के निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

हनुमान की मूर्ती होगी स्थापित
अगर इस वाटिका के लिए स्वीकृति मिल जाती है, तो इसमें वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा लोगों की धार्मिक आस्था को देखते हुए वाटिका में हनुमान की मूर्ती स्थापित की जाएगी। यहां पर लोग पूजा भी कर सकें गे।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
वानर वाटिका के निर्माण से स्थानीय वाशिंदों को रोजगार भी मिलेगा। एक तो वाटिका में जो पांच हजार बंदर रखे जाएंगे। उनके लिए अनुमानित प्रतिदिन 20 हजार रुपये की सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री की आवश्यकता रहेगी। इसके चलते स्थानीय लोग सब्जी उत्पादन करके मुनाफा कमा सकते हैं।

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