
कुल्लू। चरस माफिया पर नकेल कसने के लिए पुलिस नई तरकीब का इस्तेमाल करेगी। संदिग्ध क्षेत्रों को चिन्हित कर गोपनीय रास्तों पर पुलिस पहले ही पहरा बिठा चुकी है। पुलिस को सूचना मिली है कि घाटी में बड़े पैमाने पर भांग की खेती की गई है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। जल्द ही छापेमारी अभियान शुरू होने वाला है।
इन इलाकों से संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पुलिस पहले ही तय कर चुकी है। पुलिस महकमे के मुताबिक जिस फारेस्ट गार्ड और पटवारी के इलाके में भांग उगी पाई जाती है और वह सूचना नहीं देता है तो उसके खिलाफ भी केस दर्ज होगा। पुलिस ने खेतों में अफीम उगाने वाले तीन लोगों के खिलाफ हाल ही में मादक पदार्थ अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं। पुलिस प्रशासन ने राजस्व और वन विभाग से उनके क्षेत्रों में उगी भांग का ब्योरा मांगा है। हैरत की बात है कि एक माह बीत जाने के बाद भी दोनों ही विभागों ने पुलिस को अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी है। अब 15 जुलाई तक का समय मांगा है।
डीएसपी संजय शर्मा ने कहा कि जो फारेस्ट गार्ड और राजस्व पटवारी इसकी जानकारी मुहैया नहीं करवाएंगे और उनके क्षेत्रों में यदि भांग की खेती मिलती है तो उन पर भी केस दर्ज होगा। भांग, अफीम और गांजा जैसे नशीले पदार्थाें की अवैध खेती और तस्करी को लेकर कुल्लू घाटी पहले ही बदनामी हो चुकी है।
घाटी में बड़े पैमाने पर भांग की खेती
पुलिस और खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली है कि घाटी की सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर भांग के पौधे लहलहा रहे हैं। खराहल घाटी से लेकर चंद्रखणी जोत, मलाणा की पहाड़ियां, बिजली महादेव, लगघाटी के शालंग-कालंग, ब्यासर, मनाली, कसोल, मणिकर्ण, सैंज, बंजार और आनी-निरमंड के कई इलाकों में भांग उगाने की सूचना है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इसकी सूची भी तैयार कर रखी है।
15 जुलाई तक मांगी है सूचना
डीएसपी संजय शर्मा ने बताया है कि राजस्व और वन विभाग से उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में उगी भांग की जानकारी मांगी है। इसके लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है। संबंधित क्षेत्रों में भांग होने पर जानकारी न देने वाले फारेस्ट गार्ड और पटवारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
