
सोलन। जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई नवजात की मौत के मामले में जांच शुरू हो गई है। शनिवार को जिला चिकित्सा अधिकारी की अगुवाई में गठित टीम ने चिकित्सकों और रोगियों से पूछताछ की। रोगियों के बयान भी लिए गए हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक अस्पताल प्रबंधन ने कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया है।
चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि मरीज की शिकायत के आधार पर डाक्टर से पूछताछ की गई। वहीं प्रसूता के आसपास में दाखिल मरीजों और तीमारदारों के भी बयान लिए जा रहे हैं। अगर इस दौरान कुछ पाया जाता है तो डाक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। दूसरी ओर पीड़ित जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं है। पीड़ित का आरोप है कि मामले को दबाने की कोशिश की जा रही हैं।
बता दें कि सोलन जिला अस्पताल में वीरवार रात को प्रसव के दौरान नवजात बच्चे की मौत हो गई थी। परिजनों से चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने के आरोप जडे़ थे। इस पर अस्पताल प्रशासन ने संबंधित डाक्टर पर जांच बैठा दी गई है। प्रसूति महिला के पति ने इसकी शिकायत पुलिस को भी दी है। हालांकि पुलिस अभी कार्रवाई करने से बच रही है।
अभी तक की जांच में कुछ स्पष्ट नहीं
चिकित्सा अधीक्षक डा. यशवंत शर्मा ने कहा कि मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक जांच में स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चिकित्सक दोषी हैं। जल्द ही जांच पूरी कर दी जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित चिकित्सक को नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत की हत्या
या
जांच को गठित टीम पर उठे सवाल
साथी चिकित्सक ही टीम में शामिल
सोलन। नवजात की मौत में पीड़ित की शिकायत के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने जांच तो बैठा दी, लेकिन क्या यह जांच न्याय के नैसर्गिक सिद्धांतों पर पूरी उतरती है। क्या जांच निष्पक्ष होगी? पीड़ित दलीप कुमार ने जांच के लिए गठित टीम पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित का कहना है कि गठित टीम चिकित्सकों की है। ऐसे में न्याय के नैसर्गिक सिद्धांत की हत्या हुई है। जो जिन चिकित्सकों पर उन्होंने लापरवाही का आरोप लगाया है वह जांच टीम में शामिल चिकित्सकों के साथ ही कार्यरत हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती है। दलीप ने तो आरोप लगाया है कि यह मामले को दबाने की कोशिश हो सकती है। पीड़ित ने स्वास्थ्य मंत्री और उपायुक्त से मामले के लिए अलग टीम गठित करने की मांग उठाई है।
कोट
विभागीय जांच के आधार पर होगी कार्रवाई
एसपी सोलन डा. रमेश छाजटा ने कहा कि यदि अस्पताल प्रशासन पहले विभागीय जांच पूरी करेगा। जांच रिपोर्ट में यदि चिकित्सकों की गलती पाई जाती है और प्रबंधन पुलिस को सूचित करता है तो आरोप लगने वालों के खिलाफ कार्रवाई अमन में लाई जाएगी। पुलिस अभी इस बारे में कुछ नहीं कर सकती।
