नरेन्द्र मोदी के नाम को लेकर भाजपा में गतिरोध बरकरार

जालंधर: देश में आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए भाजपा ने तैयारी कसने में अभी तक कोई कसर नहीं छोड़ी है। गोवा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नरेंद्र मोदी को चुनाव समिति का प्रमुख घोषित करने के बाद पार्टी में गुटबाजी खुल कर सामने आ गई है। ऐसे में पार्टी किस आधार पर चुनाव लड़ेगी तथा किस तरह से अपने कैडर को एक्टिव करेगी, यह पार्टी के गंभीर नेताओं की चिंता का विषय है।

पार्टी के अंदर लाल कृष्ण अडवानी के साथ-साथ कई नेता हैं जो मोदी के वर्किंग स्टाइल से खुश नहीं हैं तथा गोवा बैठक के बाद से लगातार मोदी को ‘इग्नोर’ कर रहे हैं। वीरवार को महाराष्ट्र में मोदी की फेरी के दौरान वहां से वरिष्ठ नेता तथा पार्टी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी ही गैरहाजिर रहे। मोदी की महाराष्ट्र फेरी लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार करने के लिए थी। मोदी के साथ वहां की कोर कमेटी ने बैठक कर कई मसलों पर विचार किया। लेकिन कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य होने के बावजूद गडकरी नहीं आए।

बेशक गोवा में मोदी के नाम की घोषणा के बाद गडकरी ने मोदी के साथ खूब खुशहाल माहौल में बातचीत की थी लेकिन उसके बाद वीरवार को गडकरी के मोदी के कार्यक्रम से दूर रहना कई मामलों की तरफ इशारा कर रहा है। मोदी के इस आयोजन में वहां के अध्यक्ष राजीव प्रताप रूड़ी, गोपीनाथ मुंडे व पार्टी के अधिकतर वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। ऐसे में गडकरी का न आना पार्टी के अंदर की लड़ाई को सामने लाने के लिए काफी है।

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा को केंद्र की सत्ता में देखने का सपना संजोने वालों के लिए यह स्थिति काफी चिंता का विषय है। अगर पार्टी में इस तरह से मोदी को लेकर अंदरखाते विरोध चलता रहा तो कैडर को संगठित करना आसान नहीं होगा। महाराष्ट्र में राजग की सहयोगी शिव सेना ने पहले ही उतराखंड में गुजरात के 15 हजार लोगों को बचाने के मोदी के अभियान पर भी एतराज जताया था। सेना के मुखपत्र सामना में कहा गया था कि मोदी अगर राष्ट्र के नेता हैं तो उन्हें एक राज्य को पहल नहीं देनी चाहिए। मोदी पर सेना की इस टिप्पणी को लेकर भी दोनों दलों के बीच के रिश्तों में कड़वाहट का आभास हो रहा है।

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