
काईस (कुल्लू)। पीणी, तलपीणी पंचायत के लोगों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही। सेब का सीजन शुरू हो चुका है लेकिन पार्वती नदी पर बने पैदल पुल की हालत अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाई है। झूला पुल भी जवाब दे चुका है। पुल क्षतिग्रस्त होने से बरसात के दिनों में नदी पार करना लोगों के लिए जोखिम भरा है। ग्रामीण खुद को खतरे में डालकर नदी पार कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पुल को जल्द नए सिरे से बनाया जाए। मणिकर्ण घाटी का यह इलाका सेब उत्पादन के लिए मशहूर है। सड़क सुविधा से वंचित
इन गांवों के बागवानों के लिए सेब सड़क तक पहुंचाने के लिए पैदल पुल ही एकमात्र जरिया है। पीणी, तलपीणी, कसलादी, शायटा, टिक्क्र, गजियारी, रसोलीबेहड़, ढनाली, पडे़ई रोमासेरी, कोलीबेहड़, अप्पर बनाशा, बनाशा, भेगटा, फलाटी, गिरवाकोठी और कराड़ के हजारों ग्रामीण इस पुल के सहारे जिला मुख्यालय से जुड़े हैं।
ग्रामीण महेंद्र सिंह, चोलू राम, शिव राम, मोहन लाल, केशव राम, सूरज सिंह, लोसरी देवी,विमला देवी,कमला देवी, लालीदेवी,बरू देवी, वेद राम, तलपीणी पंचायत के उपप्रधान मोहर सिंह ठाकुर और फाटी पीणी किसान क्लब के अध्यक्ष हिम सिंह ठाकुर ने प्रशासन तथा सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस पुल का निर्माण किया जाए। जिला परिषद सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि इस पुल की तमाम औपचारिकताएं पूरी कर मंजूरी के लिए सरकार को भेज दी हैं। स्वीकृति मिलते ही पुल का निर्माण कार्य आरंभ करवा दिया जाएगा। डीसी राकेश कंवर ने कहा कि यदि ऐसी दिक्कतें हैं तो संबधित विभाग से जवाबतलब होगा।
