
नई दिल्ली: नक्सलियों के जेल से भागने की आशंका के चलते केन्द्र ने माओवादी हिंसा से प्रभावित राज्यों से कहा है कि वे उन कारागारों की सुरक्षा कड़ी करें, जहां बागी नेता बंद हैं। इन राज्यों से सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बंद बागी नेताओं को छुडाने के प्रयासों को किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने नक्सल हिंसा प्रभावित नौ राज्यों छत्तीसगढ, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से कहा है कि नक्सली अब जेल में बंद अपने नेताओं को छुडाने के लिए बेताब हैं क्योंकि कुछ नक्सली नेता ही अब सक्रिय रह गये हैं और वे फरार हैं।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि केन्द्र सरकार ने राज्यों से उन जेलों के भीतर और बाहर सुरक्षा कड़ी करने के लिए कहा है, जहां नक्सल नेता बंद हैं। राज्यों से कहा गया है कि जेलों पर हमले की माओवादियों की किसी भी कोशिश को नाकाम करने के लिए खुफिया नेटवर्क मजबूत किया जाए। यह एडवाइजरी (परामर्श) सुरक्षाबलों द्वारा भाकपा-माओवादी के शीर्ष नेता मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति द्वारा कुछ वरिष्ठ कैडरों को भेजे 17 पृष्ठ के पत्र की बरामदगी के बाद जारी की गयी है।
गणपति ने अपने पत्र में कहा है कि भूमिगत नक्सल नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे जेल में बंद अपने कामरेडों को बाहर निकलने में मदद करें, चाहे उनकी जमानत हासिल कर या फिर जेल तोडकर। गणपति ने झारखंड के चाईबासा में 17 जनवरी 2011 को जेल तोडने की घटना का जिक्र पत्र में किया है, जब तीन वरिष्ठ माओवादी नेता मोतीलाल सोरेन, रघुनाथ हेम्ब्राम और मंगरू महतो अपनी बैरकों का लोहा काटकर भाग निकले थे।
