नई तकनीक अपनाएं मत्स्य पालक : श्रीधर

बिलासपुर। ‘हिमाचल में मत्स्य मूल्यांकन एवं विकास’ विषय पर मंगलवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला का आगाज हुआ। दो दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न प्रजातियों की मछलियों को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक पहलुओं पर मंथन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ मत्स्य पालन विभाग के प्रधान सचिव तरुण श्रीधर ने किया। इस अवसर पर विभाग के निदेशक गुरुचरण सिंह और उपायुक्त डा. अजय शर्मा भी उपस्थित रहे।
प्रधान सचिव ने कहा कि हिमाचल के लोगों को झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र की तर्ज पर मछली व्यवसाय में काम करना चाहिए। क्योंकि मछली पालन एक ऐसा व्यवसाय है, जिससे प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों के लोग जलाश्यों, तालाबों, नदियों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से मछली के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। हिमाचल में 800 मीट्रिक टन मछली पैदा कर की जा रही है। आज आधुनिक तरीके से यदि 15-20 मछली पालन के केज लगा दिए जाए। उन्होंने विभिन्न राज्यों से आए मत्स्य विशेषज्ञों तथा प्रदेश भर से आए मत्स्य उत्पादकों से आह्वान किया कि इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश भी दिए कि आईसीआर की खोज पर निर्भर न रहकर स्वयं भी हिमाचल में मत्स्य अनुसंधान पर कार्य करते रहें।
इससे पहले कार्यशाला के शुभारंभ पर अतिरिक्तसचिव अनुपम कश्यप ने कहा कि आज मत्स्य पालन एक अनुसंधान प्रक्रिया है तथा इस व्यवसाय से हजारों लोग अपनी जीविका अर्जित कर रहे हैं। गोबिंदसागर जलाशय ने 121 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मछली का उत्पादन कर रहा है। उन्होंने मछुआरों से आह्वान किया कि इस राज्य स्तरीय कार्यशाला का लाभ उठाते हुए मत्स्य पालन की नई-नई तकनीकों को सीख कर अपनाएं। इस दो दिवसीय कार्यशाला में कुल्लू ट्राउट फिश फार्मर्स ने भी भाग लिया तथा उन्होंने ट्राउट मछली पालन के बारे में जो समस्याएं आ रही हैं ही उसे भी कार्यशाला में रखा।

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