
धर्मशाला। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में वीरवार को धर्मशाला के बचत भवन में काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी जिला के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रसिद्ध कवियों एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध साहित्यकार डा. परमानंद ने किया। प्रसिद्ध साहित्यकार डा. गौतम व्यथित ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर डा. परमानंद एवं डा. गौतम व्यथित ने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्य एवं संस्कृति का संरक्षण करना समय की आवश्यकता बन गई है। क्योंकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से विमुख होने लगी है और उनका रुझान पाश्चात्य सभ्यता की ओर बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अच्छे साहित्य के सृजन से समाज में सकारात्मक सोच उत्पन्न होती है। इससे स्वच्छ समाज के निर्माण की कल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि साहित्य के साथ-साथ काव्य का भी बहुत महत्व है। काव्य पाठ में कवि की ओर से अपने विचारों को पिरोने के साथ-साथ समाज के लिए एक अच्छा संदेश दिया जाता है। जिला भाषा अधिकारी प्रवीण मनकोटिया ने सभी साहित्यकारों एवं कवियों का स्वागत किया। इसके अलावा जिला लोक संपर्क अधिकारी बीआर चौहान ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर डा. ललित मोहन, डाक़ुशल कटोच, डा. नागपाल, प्रताप जरयाल, डा. वासुदेव प्रशांत शर्मा, देविंदा चौहान, कांति सूद, विजय कुमार पुरी, ओम प्रकाश प्रभाकर, प्रभात शर्मा, हरि कृष्ण मुरारी, सतपाल धृतवंशी, अर्जुन कनौरिया, प्रीतम लाल पुरी, शक्ति राजपूत ने अपने-अपने विचार रखे।
