
हमीरपुर। प्राथमिक स्कूल हमीरपुर में नौनिहाल खतरे के साए में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल भवन में कुल तीन कमरे हैं। इनमें से एक की हालत खस्ता हो चुकी है। हालांकि कमरे में बच्चों को नहीं बैठाया जाता परंतु परिसर में ही स्थित होने के कारण खतरा बना हुआ है। कमरे को असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के करीब 80 छात्र दो कमरों और बरामदे में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जिला मुख्यालय पर स्थित स्कूल का यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों में अंदाजा लगाया जा सकता है। तर्क यह भी दिया जाता है कि स्कूल में केवल 25 प्रतिशत बच्चे ही स्थानीय हैं, शेष 75 प्रतिशत प्रवासी समुदाय से हैं। असुरक्षित घोषित कमरे को डिसमेंटल नहीं किया जा सका है। केवल दरवाजे पर ताला जड़ा गया है।
प्राथमिक स्कूल हमीरपुर की हालत खस्ता है। स्कूल भवन की हालत बिगड़ती जा रही है। बरामदे की छत्त के पिल्लर का बेस टूट चुका है, अन्य पिल्लर भी खिसक रहे हैं। स्कूल में स्थित तीन में से दो कमरों में पांच कक्षाओं की पढ़ाई चल रही है। बारिश के दिन बरामदे में बच्चों को बिठाया जाता है। अधिक बारिश होने से मैदान भी पानी से भर जाता है। जिन दो कमरों में कक्षाएं चल रही हैं उनकी छत भी मरम्मत मांग रही है। जिला मुख्यालय पर स्थित होने के बावजूद शायद शिक्षा विभाग का ध्यान स्कूल की दशा की ओर नहीं जा रहा है। उधर, स्कूल की मुख्य शिक्षिका उर्मिला देवी का कहना है कि उच्चाधिकारियों को भवन की हालत के बारे में अवगत करवा दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही समस्या का समाधान हो जाएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक भूषण मल्होत्रा का कहना है कि असुरक्षित घोषित कमरे को डिसमेंटल करने के आदेश उपायुक्त कार्यालय से होने हैं। स्कूल में नए भवन को लेकर डिमांड आएगी तो आवश्यकता के अनुसार प्रस्ताव विभाग को प्रेषित किया जाएगा।
