
नई दिल्ली। अदालत ने माना कि गैंगरेप के दोषियों ने पीड़ित युवती के शरीर पर ही बल्कि समाज को भी गहरे घाव दिए हैं। दोषियों के अपराध के कारण समाज में आक्रोश फैला। ऐसे अपराधियों को माफ नहीं किया जा सकता। समाज में यह संदेश देना जरूरी है कि अपराधियों ने जिस प्रकार का अपराध किया है उससे वे केवल मृत्युदंड के हकदार हैं। न्यायाधीश योगेश खन्ना ने अपने फैसले में दोषियों के व्यवहार को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं। अदालत ने कहा कि दोषियों ने जिस प्रकार युवती को प्रताड़ित किया व अमानवीय था। अदालत ने कहा ‘दोषियों द्वारा किया गया कृत्य एक असहाय युवती के खिलाफ ही नहीं बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध है’। अदालत ने गुरवेल सिंह मामले का हवाला देते हुए कहा इस मामले में समाज के प्रति किए गए कई अपराधों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। यह मामला भी उसी श्रेणी में आता है।
अदालत ने कहा कि समाज में मजबूती से संदेश भेजना जरूरी है कि ऐसे अपराध को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। महिलाओं के प्रति बर्बर अपराध करने वाले लोगों को कड़ी सजा देकर आम लोगों विशेषकर महिलाओं में विश्वास पैदा करना जरूरी है। अदालत ने कहा कि दोषियों ने पीड़ित एवं असहाय युवती के साथ अत्यंत क्रूर, विचित्र, शैतानी व नृशंस तरीके से व्यवहार किया उससे सभी हैरान हैं।
अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता के चेहरे, होंठ, जबड़े, दाएं व बाएं कान, जांघ, जननांग इत्यादि पर काटने के निशान पाए गए । दोषियों ने उसे बालों से खींच कर चलती बस से नीचे फेंक दिया। युवती की आंतें अलग-अलग क्षतिग्रस्त रूप से मिली। अदालत ने कहा कि इस मामले में दोषियों ने जिस प्रकार का बर्बर व अमानवीय अपराध किया है वह जघन्य की श्रेणी में आता है। उनका अपराध उनकी मानसिक विकृति को दर्शाता है और ऐसे अपराधी को मृत्युदंड से कम सजा नहीं दी जा सकती, वे इसी सजा के हकदार है।
दया संबंधी तर्क खारिज
अदालत ने दोषियों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि वे नाबालिग व युवा हैं। अदालत ने कहा कि वे दोषी ठहराए जा चुके हैं और वर्तमान में यह कोई मुद्दा नहीं है। अदालत ने मुकेश के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उसने सभी की भूमिका व इकबालिया बयान देकर अदालत व समाज की सहायता की है और उसके साथ दया बरती जाए। अदालत ने कहा कि मुकेश ने उस समय अपना अपराध कबूल किया जब उसके खिलाफ सभी ठोस साक्ष्य पेश किए जा चुके थे और अपराध की कड़ी साबित हो चुकी थी। ऐसे में इन दोषियों से सहानुभूति नहीं बरती जा सकती।
