दोबारा होगी पूर्व डीजीपी के भवन की पैमाइश

शिमला। नवबहार में अवैध निर्माण के मामले में घिरे राज्य के पूर्व डीजीपी डीएस मन्हास ने नगर निगम से उनके भवन की पैमाइश दोबारा से करने की मांग उठाई है। डीएस मन्हास की ओर से शुक्रवार को निगम आयुक्त के कोर्ट में पेश हुए वकीलों ने तीन जनवरी को हुई पैमाइश के प्रति नाखुशी जताई है। इनका कहना है कि तीन जनवरी को उनकी ओर से मौके पर कोई भी मौजूद नहीं था। उधर, आयुक्त कोर्ट ने दोबारा से पैमाइश करने के लिए 15 जनवरी का दिन तय किया है। इस दिन निगम की ओर से वास्तुक योजनाकार सहित अन्य कर्मी मौके पर जाएंगे।
पूर्व डीजीपी का बहुमंजिला भवन नवबहार के समीप है। 1989 में पहली बार मकान का निर्माण करने के लिए नगर निगम में ग्राउंड फ्लोर, फर्स्ट फ्लोर, सेकेंड फ्लोर और थर्ड फ्लोर का नक्शा स्वीकृत करने के लिए दिया गया था। आरोप है कि पूर्व डीजीपी ने स्वीकृत नक्शे के बाहर भवन का निर्माण किया। हालांकि, 2011 में एनओसी के लिए नगर निगम की दरख्वास्त दी गई, लेकिन जब मकान से संबंधित नक्शे और अन्य दस्तावेज मांगे गए तो उन्होंने जमा नहीं कराए। 1992 में जब डीएस मन्हास आयुक्त शिमला थे तो उनकी पत्नी की ओर से भवन के चार मंजिल के नक्शे को स्वीकृत करने के बारे में अर्जी दी गई। आरोप है कि डीएस मन्हास ने खुद ही चार मंजिलों की एनओसी दे दी। इस दौरान 27 जनवरी से 15 फरवरी तक छुट्टी पर चले गए। नगर निगम आयुक्त का अतिरिक्त कार्यभार तत्कालीन उपायुक्त के पास था। पंद्रह फरवरी को उपायुक्त से नक्शा पास करवाया गया। इसके बाद जब वापस पुलिस महकमे में चले गए तो तत्कालीन नगर निगम आयुक्त से भी भवन की मंजिल पास करवाई गई।

इनसेट…
एसी कोर्ट ने जवाब देने को दिया आखिरी मौका
पूर्व डीजीपी डीएस मिन्हास पर स्वीकृत नक्शे से बाहर निर्माण करने का मामला सहायक आयुक्त के कोर्ट में चल रहा है। सहायक आयुक्त के कोर्ट ने पूर्व डीजीपी को नवबहार में सरकारी भूमि पर निर्माण करने का दोषी पाते हुए नोटिस जारी किया है। इस मामले में शुक्रवार को पूर्व डीजीपी की ओर से जवाब दायर करने का कहा गया था, लेकिन शुक्रवार को कोर्ट में कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके चलते सहायक आयुक्त नरेश ठाकुर ने कोर्ट ने 15 जनवरी को जवाब दायर करने का अंतिम मौका दिया है। पूर्व डीजीपी पर अपने नवबहार स्थित मकान के पास सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने का आरोप है। निगम के मुताबिक पूर्व डीजीपी ने 959 वर्ग मीटर की बाउंड्री वॉल नगर निगम की भूमि पर बनाई है। पब्लिक प्रीमिसिस एक्ट 1971 के तहत पूर्व डीजीपी को सहायक आयुक्त के कोर्ट ने नोटिस भेजा है।

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