दुराचार के दोषी को सात साल कैद

ऊना। विशेष जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीके शर्मा के न्यायालय ने दुराचार के मामले में एक युवक को दोषी करार दिया है। दोषी के खिलाफ न्यायालय ने कैद एवं जुर्माना की सजा का फैसला सुनाया है। जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि न्यायालय ने गुरमुख सिंह पुत्र नारायण दास को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षक अधिनियम 2012 की धारा-4 के तहत दोषी ठहराते हुए सात वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषी को पांच हजार रुपये जुर्माना भरने के भी आदेश हुए हैं। जुर्माने की अदायगी न करने की हालत में दोषी को तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
एनसी घई ने बताया कि 14 मार्च 2013 को क्षेत्र की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि शौच जाते समय दोषी ने उक्त वारदात को अंजाम दिया। उस दिन पीड़ित छात्रा की मां घर पर नहीं थी, इसलिए पीड़िता द्वारा इस घटना की जानकारी अपनी माता को दूसरे दिन देने के बाद पुलिस ने 15 मार्च को दोषी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 13 जून को अदालत में आरोप पत्र दायर किया। अभियोजन पक्ष की ओर से इस केस में दोषी के खिलाफ 19 गवाहों को पेश किया गया। उनकी दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने गुरमुख सिंह को दोषी करार देते हुए सात वर्ष कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। बचाव पक्ष ने न्यायालय में गुहार लगाई कि दोषी की सजा कुछ कम की जाए। न्यायालय ने दुराचार को घिनौना अपराध बताते हुए कहा कि ऐसा करने से समाज में महिलाओं पर अत्याचारों में और बढ़ोतरी हो सकती है। लिहाजा सजा को कम नहीं किया जा सकता। जिला न्यायवादी ने बताया कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षक अधिनियम 2012 के तहत यह प्रदेश में पहला मामला है, जिसमें अदालत ने 55 दिन में ही इस दोषी के खिलाफ सजा सुनाई है। इस केस में आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला दर्ज हुआ था।

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