
ऊना। विख्यात धार्मिक स्थल पीर निगाह में आठ वर्षीय बालिका का अपहरण करने के बाद उसके साथ दुराचार की वारदात में न्यायालय ने आरोपी युवक को दोषी करार देते हुए दस वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष, जिला एवं सत्र न्यायाधीश रतन सिंह ठाकुर ने बालिका के अपहरण और दुराचार के दोषी मुकेश कुमार पुत्र रामस्वरूप निवासी नकोदर जिला जालंधर पंजाब के खिलाफ उक्त सजा सुनाई है।
जिला न्यायवादी एनसी घई ने बताया कि दोषी को भादंसं की धारा 366 के तहत पांच वर्ष कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई। जुर्माना न भरा तो दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पोक्सो एक्ट की धारा छह के तहत दोषी को दस वर्ष कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं भरा तो अतिरिक्त तीन माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। जुर्माना राशि मुआवजे के तौर पर पीड़िता को जारी होगी। घई ने आगे बताया कि पंजाब की बच्ची अपने परिजनों के साथ पीर निगाह जाने के लिए 31 मार्च 2013 को ऊना पहुंची। वह बस अड्डे से आटो रिक्शा के जरिये पीरनिगाह के लिए रवाना हुए। इस दौरान उसी आटो रिक्शा में मुकेश भी पीर निगाह के लिए उनके साथ बैठ गया। पीर निगाह में दोषी इस परिवार का पीछा करता रहा। यह बच्ची तथा उसका परिवार एक सराय में सोने गए। युवक ने भी सोने के लिए वहीं जगह ली। बच्ची के पिता को उसने कहा कि नीचे कंबल मिल रहे हैं। उन्हें वह अपने साथ ले गया और जहां कंबल मिल रहे थे, वह जगह उन्हें दिखाई। इस बीच आरोपी वहां से गायब हो गया और बच्ची की मां से कहा कि बच्ची को उसके पिता बुला रहे हैं। बच्ची उसके साथ हाल से निकली और वह बच्ची को जंगल की ओर ले गया, जहां उसने बच्ची से दुराचार किया। आधी रात को बच्ची परिजनों को पीर निगाह मंदिर गेट के पास मिली। सूचना पर सदर थाना पुलिस भी पीर निगाह पहुंची। आरोपी को अगले दिन जंगल से गिरफ्तार किया गया। उसके कपड़ों में भी खून लगा था। बच्ची तथा आरोपी के कपड़ों को एफएसएल भेजा गया। डीएनए टेस्ट भी हुए। पुलिस ने केस का चालान 29 जून को न्यायालय में पेश किया था। इस पर न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ यह अहम फैसला सुनाया है। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने दोषी के खिलाफ 27 गवाह पेश किए।
