दिल्ली में गाड़ियों के साथ बढ़ी पार्किंग की दिक्कत

नई दिल्ली। दिल्ली में वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन एमसीडी पार्किंग सुविधा देने में पिछड़ रही है। निगम बंटवारे के बाद उम्मीद थी कि पार्किंग सुविधा पर एजेंसी ध्यान देगी और दिक्कत घटेगी लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। बाजारों, बिजनेस कॉम्प्लेक्स व सरकारी कार्यालयों में कार, दुपहिया वाहन खड़े की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। तीनों एमसडी की पार्किंग में सिर्फ एक लाख वाहनों के खड़े करने की व्यवस्था है जबकि राजधानी में 70 लाख प्राइवेट वाहन रजिस्टर्ड हैं। इतना ही नहीं हर साल तीन लाख से अधिक वाहन जुड़ भी रहे हैं। राजधानी में पार्किंग की सुविधा नासूर बनी हुई है। राजधानी में वाहनों की संख्या निरंतर बढ़ने के बावजूद पार्किंग सुविधा में में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। जब एमसीडी थी तब भी पार्किंग 300 का आंकड़ा पार नहीं कर सकी थी। अब तीन एमसीडी हो गई हैं तब भी नगर निगम की 264 पार्किंग चल रही हैं। इन पार्किंग में एक समय एक लाख वाहन भी नहीं खड़े हो सकते।
दिल्ली नगर निगम के बंटवारे के बाद पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम की तो अच्छी कोशिश सामने आई है। इस मामले में उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने भी कुछ सुधार किया है। मगर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की चाल में कोई नयापन देखने को नहीं मिला।
मास्टर प्लान के प्रावधानों और कॉमनवेल्थ गेम्स के मद्देनजर दिल्ली नगर निगम ने विभिन्न प्रमुख बाजारों एवं अन्य स्थानों पर पार्किंग बनाने की योजना तैयार की थी, लेकिन आधे जगह ही पार्किंग बनाई जा सकी है। खास बात यह है कि उनमें से एक भी पार्किंग में वाहन खड़े करने की शुरुआत नहीं हुई है।
मास्टर प्लान की शर्तों के चलते बाजारों में पार्किंग सुविधा के लिए व्यापारी कई सौ करोड़ रुपये पार्किंग शुल्क के रूप में दे चुके हैं। वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के सिलसिले में बनाई जाने वाली पार्किंग में नगर निगम का एक रुपया भी खर्च नहीं होना था। वह सभी 15 पार्किंग पीपीपी स्कीम के तहत बनाई जानी थीं।

नई पार्किंग के लिए ढूंढी जा रही जगह
स्थाई समिति के अध्यक्ष राजेश गहलोट ने माना कि पार्किंग सुविधा आवश्यकता अनुसार नहीं है। इस दिशा में पहल की जा रही है। नई पार्किंग शुरू करने के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। उनकी कोशिश है उन सभी स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था हो जहां निरंतर लोग आते हैं। उन्होंने पार्किंग समस्या के लिए यातायात पुलिस को भी दोषी ठहराया। उनका कहना है कि यातायात पुलिस नई पार्किंग शुरू करने की योजना में अड़ंगा लगाती है, जबकि उन स्थानों पर चलने वाली अवैध पार्किंग को रोकने का कोई प्रयास नहीं करती।

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