दस फीसदी लग्जरी टैक्स मंजूर नहीं

कुल्लू। यदि प्रदेश के होटल व्यवसायियों पर दस फीसदी लग्जरी टैक्स थोपा जाता है, तो प्रदेश के होटल व्यवसायियों का कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा। होटल कारोबारियों का कहना है कि होटल व्यवसायियों पर दस फीसदी लग्जरी टैक्स लगाना उचित नहीं है। उनका कहना है प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कुल्लू-मनाली समेत प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी पर्यटन सीजन होता है और पर्यटन सीजन के रेट पर ही पूरे साल का लग्जरी टैक्स लगाना उचित नहीं है। मनाली स्टेक होल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष गजेंद्र ठाकुर ने बताया कि पहले जिस रेट पर होटल का कमरा दिया जाता था, उसी रेट पर लग्जरी टैक्स लगता था। लेकिन, अब प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग कमरे के फुल रेट और 30 फीसदी छूट के हिसाब से लग्जरी टैक्स लगाने की तैयारी में है। इसमें कुल्लू-मनाली समेत प्रदेश भर का पर्यटन कारोबार प्रभावित होगा और मंदी की मार झेल रहे होटल कारोबारियों को और नुकसान उठाना पड़ेगा। होटल एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप ठाकुर ने बताया कि कुल्लू-मनाली और प्रदेश के अन्य भागों में केवल दो माह ही पर्यटन सीजन होता है। साल में अधिकतर समय तो कई होटल खाली रहते हैं और ऑफ सीजन में तो कई होटल 50 से 60 फीसदी तक छूट में भी कमरे देते हैं। ऐसे में लग्जरी टैक्स लगाने का नया तरीका गलत है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि लग्जरी टैक्स को पुराने प्रारूप में ही रहने दें और कुल्लू-मनाली समेत प्रदेश में नए पर्यटक स्थल विकसित किए जाएं।
होटल कारोबारियों को लगेगा चूना
यदि एक कमरा दो हजार रुपये का है, तो उस पर दो सौ रुपये लग्जरी टैक्स पड़ता है। ऑफ सीजन में वही कमरा होटल कारोबारी पचास फीसदी डिस्कांउट के हिसाब से एक हजार रुपये में दे रहे थे और उस पर सौ रुपये लग्जरी टैक्स लगता था। लेकिन, अब नए प्रारूप के अनुसार होटल व्यवसायी कमरा चाहे जिस भी रेट पर चढ़ाएं, उन्हें पूरा लग्जरी टैक्स देना ही पड़ेगा। यानी होटल व्यवसायियों को अपनी जेब से सौ रुपये देने पड़ेंगे।

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