
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। देव समाज से जुडे़ लोग इस देव समागम में भागीदारी को लेकर इन दिनों जोर-शोर से तैयारियों में जुट गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से निमंत्रण पत्र मिलने के बाद कारकूनों ने देवालयों से देवताओं के मुख-मोहरों, प्रतीकात्मक वस्तुओं तथा धातुओं से निर्मित परंपरागत वाद्य-यंत्रों को बाहर निकाल कर इनको चमकाना शुरू कर दिया है। इस बार दर्जनों देवी देवता नए मुख मोहरों के साथ नजर आएंगे। दशहरा की तैयारियों के बीच देवलु बागवानी और खेतीबाड़ी से जुटे कामकाज को भी शीघ्रता से निपटाने के लिए रात-दिन एक किए हुए हैं। इन दिनों जिला प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय लोक उत्सव दशहरा उत्सव की तैयारियों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है। बैठकों का सिलसिला चल रहा है। जिले के दूरदराज से आने वाले देवी-देवताओं के कारकूनों, हरियानों व देवलुओं ने दशहरे में भागीदारी के लिए पूरे जोरशोर के साथ तैयारियाें में जुट गए हैं। आनी-निरमंड क्षेत्र से दर्जनभर देवी देवता डेढ़ से दौ किमी का पैदल सफर कर दशहरा पर्व की शोभा बढ़ाते आए हैं। कुल्लू पहुंचने में उन्हें 10 से 15 दिन का समय लग जाता है। लिहाजा, उन्होंने इसी के अनुरूप तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिले के सबसे अमीर एवं आनी घाटी के अधिष्ठाता देवता खुडीजल, व्यास ऋषि कुंईर, टकरासी नाग, कोट पुझारी व चोतरू नाग सहित निरमंड घाटी के कशोली चंभू, देवी दुराह, सप्त ऋषि थंथल व देवता देउगी चंभू आदि देवताओं के मुख-मोहरों, प्रतीकात्मक वस्तुओं सहित अन्य वाद्य-यंत्रों को देवालय से बाहर निकाल कर उनकी साज-सज्जा की जा रही है। देवता खुडीजल के कारदार शेर सिंह ने कहा कि दशहरे में भागीदारी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आनी-निरमंड के देवी-देवता किस-किस दिन कुल्लू के लिए प्रस्थान करेंगे, इसकी तिथि निश्चित करने के लिए बैठकों का दौर चला हुआ है।
