दर-दर की ठोकरें खा रहा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का पोता

डीडीहाट। प्रतियोगी परीक्षा पास करने के तीन साल बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पोते को नियुक्ति नहीं मिल सकी है। लंबा इंतजार करने के बाद उनका पोता दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। सरकार की इस बेरुखी से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देव सिंह डसीला (95) के पोते महेश सिंह डसीला ने 2010 में आईटीआई अनुदेशक की परीक्षा पास की। इसके डेढ़ वर्ष बाद भी उनको नियुक्ति पत्र जारी नहीं हो सका। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देव सिंह डसीला ने कई बाद देहरादून के चक्क लगाए और सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इसकी पड़ताल की। इसके उत्तर में उन्हें अनुदेशक भर्ती परीक्षा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों के लिए कोई भी सीट नहीं होने की जानकारी दी गई। देव सिंह डसीला कहते हैं कि भर्ती में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों के लिए सीटें आरक्षित नहीं होना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान है। बताया कि इस मामले को उन्होंने सभी राजनीतिक पार्टियों के सामने उठाया। मगर किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया। अब उन्होंने राष्ट्रपति से इसकी शिकायत की है।

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