तो खतरे में है मित्र कीटों का अस्तित्व

खराहल (कुल्लू)। फसलों की अधिक पैदावार की होड़ और अनभिज्ञता के कारण खेत खलियानों में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशकों से मित्र कीटों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। यही नहीं अधिक कीटनाशकों का इस्तेमाल साग सब्जियों और फलों पर करने से स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
किसानों-बागवानों तथा पर्यावरण का सहायक माने जाने वाले मित्र कीट के वजूद पर मंडराए खतरे से पर्यावरण प्रेमी भी चिंतित हैं। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में इन मित्र कीटों की अहम भूमिका होती है। अधिकतर किसान और बागवान इस कीट के बारे में अनजान हैं। इस कीट को लेडीबीटल, लेडी र्ब्ड बीटल तथा साधारण भाषा में ताते के नाम से जाना जाता है। यह मित्र कीट बागवानों और किसानों के शत्रु कीटों को अपना शिकार बनता है। यह परभक्षी कीट मुख्य रूप से स्केल, माइट, एफिड और सूडियों तथा थ्रीप्स कीटों को अपना आहार बनाकर जीवन निर्वहन करता है।
बागवानी विश्व विद्यालय नौणी के कीट विभाग के प्रमुख डा. जेपी शर्मा ने कहा कि यह लेडीबीटल कीट अपने जीवन काल में पांच हजार से अधिक शत्रु कीटों को खाकर चट करता है। एक साल में इसकी पांच से छह पीढ़ियां जन्म लेती हैं। प्रत्येक अंडे को पूर्ण विकसित करने के लिए उसेे 3 से 10 शत्रु कीट की जरूरत पड़ती है। बागवानों के लिए पौधों को नष्ट करने वाले कीड़ों को खाने वाला प्रकृति का यह एक अमूल्य वरदान है। ऐसे में इस कीट को सुरक्षित रखना कम कीटनाशक के इस्तेमाल होने से संभव हो सकेगा।

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