
मक्की को हुए नुकसान पर किसान और विभाग का आकलन मेल नहीं खा रहा है। कृषि विभाग की ओर से तेज तूफान से मात्र दस फीसदी नुकसान बताया जा रहा है, लेकिन किसानों को कृषि विभाग को तर्क हजम नहीं हो रहा है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं किसान तूफान से मक्की की फसल को भारी नुकसान बता रहे हैं।
मक्की की फसल खेतों में बिछ गई है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि तूफान से मक्की को भारी नुकसान हुआ है। ग्यारह ग्रां पंचायत प्रधान बीना शर्मा, पूर्व प्रधान रमेश चंद, जगदीश चंद, रोशन लाल का कहना है कि उन्हें मक्की की अच्छी उपज की उम्मीद थी, लेकिन तूफान के कारण उनकी फसल तबाह हो गई है। उनके क्षेत्र में मक्की की फसल पककर पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है। धबड़ियाणा पंचायत के गांव लंगीरी के शंकर दास, कांता देवी, सुमना देवी, लोहारड़ा गांव के प्रकाश चंद, सुभाष चंद, मिलाप सिंह, कै. बलदेव, नेरी गांव के अजीत कुमार, राहिल गांव के अनंत राम ने बताया कि उनकी मक्की की फसल अभी पककर तैयार नहीं हुई है कि तूफान ने भारी नुकसान कर दिया। फसल टूटने से अधिक नुकसान हुआ है। बिझड़ी क्षेत्र के बाड़ा, सठवीं, सकरोह, दलचेहड़ा, चकमोह, भोटा क्षेत्र के मोरसू, गरली क्षेत्र में अभी फसल पककर तैयार नहीं हुई है। क्षेत्र के किसानों सुरेश कुमार, बालकृष्ण, संजय कुमार तथा राजेश कुमार का कहना है मक्की की फसल अभी दस दिन बाद पककर तैयार होनी थी, लेकिन तूफान के कारण किसानों को कच्ची फसल उठाने को विवश होना पड़ रहा है। फसल उठाने के लिए किसानों को अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ रविंद्र चौहान ने बताया कि फसल पककर तैयार हो चुकी है। दस फीसदी से अधिक नुकसान नहीं हुआ है। विभाग नुकसान का आकलन तैयार कर रहा है। सभी क्षेत्रों से रिपोर्ट मांगी गई है।
