
उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में भले ही डॉक्टरों की कमी है लेकिन मैदानी जनपदों की स्थिति ज्यादा खराब है। स्वास्थ्य महकमे के साथ केंद्र की सबसे बढ़ी चिंता हरिद्वार जनपद को लेकर है।
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अधिक आबादी वाले जनपद में शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर आदि संकेतकों के आंकड़े सुधारने के लिए मैदानी जनपदों में मौजूदा सेवाएं दुरुस्त करने पर जोर दिया है। इसी दिशा में बुधवार को मिशन निदेशक डी सेथिंल पांडियन ने हरिद्वार जनपद के सरकारी चिकित्सा संस्थानों का औचक निरीक्षण कर योजनाओं की समीक्षा भी की है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनआरएचएम में निर्धारित स्वास्थ्य संकेतक लक्ष्य मैदानी जनपदों में हासिल करना स्वास्थ्य विभाग के लिए अधिक चुनौती भरा बना हुआ है। मिशन के तहत अब विभाग का पूरा फोकस हरिद्वार जनपद पर रहेगा।
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यहां शिशु मृत्यु मृत्यु दर, मातृ मत्यु दर और संस्थागत प्रसव की स्थिति को सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। मिशन निदेशक पांडियन ने बताया कि अस्पतालों में सुविधाएं सुदृढ़ करने पर हमारा जोर है। संस्थागत प्रसव की संख्या को बढ़ाने के लिए सीएचसी स्तर पर विशेषज्ञों की सुविधा दी जाएगी। रुड़की और मंगलोर में सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश अधिकारियों को जारी भी कर दिए हैं।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम
आंगनवाड़ी से लेकर इंटर तक के छात्रों को निशुल्क इलाज देने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना पर जोर दिया जा रहा है। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम को व्यापक स्वरूप देते 30 अक्टूबर को योजना शुरू हुई है। मिशन के तहत स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण की आनलाइन मानिटरिंग करने के साथ बीमार बच्चों को विशेषज्ञ इलाज की सुविधा तुरंत मुहैया करवाने केनिर्देश विभाग ने जारी कर दिए हैं।
