
चंडीगढ़: अब फॉरैंसिक विशेषज्ञों को मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पी.जी.आई., सैक्टर-16 जी.एम.एस.एच. और सैक्टर-32 जी.एम.सी.एच. के फॉरैंसिक विशेषज्ञ अपने अस्पताल के वीडियो कांफ्रैंसिंग रूम से ही अदालत में बैठे मैजिस्टे्रट के सामने पेश हो सकेंगे।
अस्पतालों में लीगल वीडियो कांफ्रैंसिग के लिए विशेष विंग का निर्माण किया जाएगा। सिर्फ यह डॉक्टर्स को पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ एफिडैविट लगाने की भी जरूरत नहीं रहेगी।
संदिग्ध हालात में हुई मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा रिपोर्ट समेत मौत से जुड़े कई अहम वजहों का जवाब, मारपीट के मामले तथा मैडीकल जांच से जुड़े दस्तावेजों का ब्यौरा भी आसानी के साथ डॉक्टर्स अपने अस्पताल से ही अदालत को गवाही के तौर पर दिखा सकेंगे।
यदि योजना के मुताबिक सब सही रहा तो जल्द ही शहर के इन तीन अहम सरकारी अस्पतालों में वीडियो कांफ्रैंसिंग रूम के माध्यम से अदालत तक पहुंचना आसान हो जाएगा। आज शहर में फॉरैंसिक विशेषज्ञों व स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के बीच हुई एक अहम बैठक में यह फैसला लिया गया है।
बैठक में मौजूद तमाम फॉरैंसिक विशेषज्ञों ने यही राय दी कि अस्पतालों के प्रांगण से ही रिपोर्ट की जानकारी देना उचित है। अब विशेषज्ञों की इस बैठक में लिए गए फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहे एक मामले में पेश किया जाएगा।
पहले कम्प्यूटराइज्ड पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने का भी हुआ था फैसला
इससे पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स को कम्प्यूटराइज्ड करने का फैसला लिया गया था। रिपोर्ट्स को सॉफ्टवेयर में बने पैटर्न में डालने की विशेष हिदायतें भी दी गई थीं। बाकायदा 3 दिसम्बर, 2012 को हुए अदालत के एक फैसले में कहा गया था कि अस्पताल अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को नैशनल इंर्फोमैटिक्स सैंटर की वैबसाइट पर भी डालेंगे, ताकि मैडीको-लीगल केसिज से जुड़े प्रमाणों के साथ कुछ भी छेडख़ानी न की जा सके।
डॉक्टर्स को होती है मुश्किल
अस्पताल के फॉरैंसिक और एमरजैंसी विंग से डॉक्टर्स को काम छोड़कर अदालतों में गवाही देने के लिए जाना पड़ता है। ऐसा न करने पर कोर्ट की अवमानना मानी जाती है। इस दौरान बैठक में पी.जी.आई. के आपातकालीन विंग के प्रभारी डॉ.पंकज, पी.जी.आई. फॉरैंसिक विशेषज्ञ डॉ.दलबीर सिंह, सैक्टर-32 जी.एम.सी.एच. फॉरैंसिक विभाग के प्रभारी डॉ.हरीश दासारी और डॉ.अजय, सैक्टर-16 जी.एम.एस.एच. कैज्युएलिटी विंग प्रभारी डॉ. दीपक बख्शी मौजूद थे। ई.एस.आई. रामदरबार के मैडीकल कैजुएलिटी हैड बैठक में शामिल नहीं हुए।
11 से एक बजे तक मांगा एक्सपर्ट्स ने समय
बैठक में फैसला लिया गया कि हर अस्पताल में लीगल मामलों के लिए खास वीडियो कांफ्रैंसिंग विंग होगा। विंग का इस्तेमाल अन्य किसी कांफ्रैंसिंग के लिए नहीं किया जाएगा। फॉरैंसिंक एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि कांफ्रैंसिंग का समय सुबह 11 बजे से लेकर तीन बजे के बीच रखा जाए।
बैठक में एक्सपर्ट्स ने कहा कि उन्हें चंडीगढ़ के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान तक की अदालतों में गवाही देने के लिए जाना पड़ता है। यही नहीं कई दफा वहां पहुंच कर पता चलता है कि मैजिस्टे्रट उस दिन छुट्टी पर हैं। ऐसे में कांफ्रैंसिंग शुरू होने के बाद डॉक्टर्स का समय, पैसा, परेशानी सब कुछ दूर हो सकेगी।
