डाक्यूमैंटिंग चंडीगढ़ पर प्रशासन का यू-टर्न

चंडीगढ़: डाक्यूमैंटिंग चंडीगढ़ वॉल्यूम-टू किताब पर चंडीगढ़ प्रशासन ने यू-टर्न ले लिया है। अब इस किताब को मुकम्मल करने का जिम्मा चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्कीटैक्चर को सौंपा गया है। पहले इस किताब को मुकम्मल करने के लिए कॉलेज की पूर्व प्रोफैसर किरण जोशी से संपर्क किया गया था। बाकायदा इस सिलसिले में किरण जोशी से टर्म एंड कंडीशन भी मांगे गए थे।

प्रोफैसर किरण जोशी पर प्रशासन की इस इनायत को लेकर सवाल खड़े हो गए थे। इसकी वजह प्रोफैसर किरण जोशी पर हैरीटेज आइटम्स को गायब करने के आरोप थे। प्रोफैसर किरण जोशी का नाम वर्ष 2010 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब विदेश में हुई दो नीलामियों में चंडीगढ़ की हैरीटेज आइटम्स को बेचने की बात उठी थी।

इस मामले में प्रोफैसर किरण जोशी की भूमिका कटघरे में आ गई थी क्योंकि प्रोफैसर किरण जोशी ने वर्ष 2005 के दौरान डाक्यूमैंटिंग चंडीगढ़ किताब लिखने के लिए चंडीगढ़ अर्बन डिपार्टमैंट से हैरीटेज आइटम्स को लिया था। इन हैरीटेज आइटम्स में से कुछ आइटम्स के नीलाम होने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर चंडीगढ़ प्रशासन ने प्रोफैसर किरण जोशी के खिलाफ पूर्व एस.डी.एम. अभिषेक देव को जांच का जिम्मा सौंपा था। अपनी जांच में अभिषेक देव ने प्रोफैसर किरण जोशी की भूमिका को संदिग्ध बताया था।

ऐसा इसलिए था कि जांच के दौरान प्रोफैसर किरण जोशी कई सवालों के जवाब नहीं दे पाई थीं। बेशक बाद में किरण जोशी ने सभी हैरीटेज आइटम्स को प्रशासन के सुपुर्द करने का दावा किया था लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई होनी बाकी है। इसी के चलते चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा प्रोफैसर किरण जोशी को दोबारा से किताब लिखने के लिए आमंत्रित करने पर प्रशासन कटघरे में खड़ा हो गया था।

चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव को नहीं थी जानकारी

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल की अहम वजह यह भी थी कि प्रोफैसर किरण जोशी से किताब मुकम्मल करवाने तैयारी की जानकारी चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव नाम की बॉडी के सभी सदस्यों को नहीं थी। और तो और प्रशासक के सलाहकार के.के.शर्मा भी इस बात से अनभिज्ञ थे जबकि के.के.शर्मा चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव बॉडी के चेयरमैन हैं।

प्रोफैसर किरण जोशी से किताब मुकम्मल करवाने की यह पहल चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव के कुछ सदस्यों ने अपने ही स्तर पर कर ली थी। चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव बॉडी मुख्य तौर पर ली-कार्बूजिए के कार्यों को संरक्षित करने की भूमिका निभाती है। ली-कार्बूजिए के कार्यों पर आधारित डाक्यूमैंटिंग चंडीगढ़ वॉल्यूम-टू किताब की शुरूआत चंडीगढ़ प्रसपैक्टिव ने ही की थी लेकिन प्रोफैसर जोशी पर आरोप लगने से यह काम ठप्प हो गया था।

चंडीगढ़ के वित्त सचिव वी.के. सिंह का कहना है कि डाक्यूमैंटिंग चंडीगढ़ किताब को अब चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्कीटैक्चर खुद ही पूरा करेगा। कॉलेज मैनेजमैंट का कहना है कि उनके पर्याप्त संसाधन हैं, इसलिए इस कार्य को कॉलेज में ही मुकम्मल किया जा सकता है।

कॉलेज ऑफ आर्कीटैक्चर की पूर्व प्रोफैसर किरण जोशी का कहना है कि मुझसे चंडीगढ़ प्रशासन ने किताब मुकम्मल करने के लिए टर्म एंड कंडीशन मांगे गए थे, जो मैंने प्रशासन को सौंप दिए थे। इसके बाद जवाब नहीं आया तो मैंने रिमाइंडर भी भेजा था, उसका भी जवाब नहीं आया। इससे ज्यादा मुझे इस मामले पर कुछ नहीं कहना।

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