
कुल्लू। जिला अस्पताल कुल्लू में उपचाराधीन पत्थरी तथा अपेंडिक्स के मरीजों के एक माह से आपरेशन लटके हैं। कारण, अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं। इसके चलते इन मरीजों का मर्ज बढ़ता जा रहा है। अस्पताल प्रशासन की ओर से हायर किए गए एनेस्थीसिया डाक्टर भी लंबे समय से छुट्टी पर हैं। ऐसे में इमरजेंसी केस मंडी रेफर किए जा रहे हैं। लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश का जिला कुल्लू लगभग चार जिलों कुल्लू, लाहौल-स्पीति, मंडी तथा चंबा जिले के पांगी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाता है, लेकिन अरसे से डॉक्टरों की भारी कमी के चलते लोगों को यहां उपचार करवाने में दिक्कतें हो रही हैं। अस्पताल में दर्जनों मरीज एक माह से भी अधिक समय से पत्थरी और अपेंडिक्स के आपरेशनों के लिए उपचाराधीन हैं, लेकिन सर्जन विशेषज्ञ डॉक्टर शिविर ड्यूटी में व्यस्त हैं और अस्पताल की ओर से हायर किए गए
एनेस्थीसिया डॉक्टर भी छुट्टी पर हैं। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के पास करीब पांच वर्ष से अपना एनेस्थीसिया डॉक्टर नहीं है। अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों का कहना है कि अब तक उन्होंने पूरी तरह से ठीक होना था, लेकिन डॉक्टर का इंतजार हर रोज उन्हें सताने लगा है। मरीजों के साथ आए तीमारदार तुले राम, अनूप, मोनू, टिकम राम आदि ने बताया कि हर रोज उन्हें भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। इनका कहना है कि सरकार के ढीले रवैये के चलते कुल्लू अस्पताल की स्थिति नाजुक होती जा रही है। उधर, सीएमओ कुल्लू डॉ. बलदेव ठाकुर ने माना कि हायर किया गया एनेस्थीसिया विशेषज्ञ छुट्टी पर होने से आपरेशन रुके पड़े हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर की कमी के कारण यह समस्या पेश आ रही है।
