
नई दिल्ली। ड्रंकन ड्राइविंग के बढ़ते मामले दूसरों की जान के लिए खतरा बन रहे हैं। ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाना बेहद जरूरी है। लेकिन कई मामलोें में नौजवानों को जेल भेजना सबसे अच्छा विकल्प नहीं है। ट्रैफिक नियमों को उल्लंघन करने वाले युवाओं को ट्रैफिक स्कूल भेजकर ट्रेनिंग दिलवाई जानी चाहिए। यह प्रयोग दुनिया के कई देशों में बेहतर विकल्प के रूप में कामयाब रहा है। यह टिप्पणी जिला अदालत ने एक अपील का निपटारा करते हुए की है।
रोहिणी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. कामिनी लाउ ने ड्रंकन ड्राइविंग मामलों के आरोपियों को ट्रैफिक नियमों की ट्रेनिंग देने के लिए विशेष प्रोग्राम तैयार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश रोहिणी सेक्टर नौ निवासी सुमित कुमार की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सुमित को 10 दिन कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को उसने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी।
याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने सुमित को एक साल की नेकचलनी व दस हजार रुपये के निजी मुचलके व इतनी ही राशि के एक जमानती की शर्त पर छोड़ा है। लेकिन साथ ही उसे दो दिन के भीतर डीसीपी ट्रैफिक (हेडक्वार्टर) के कार्यालय टोडापुर में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने उसे यहां पर 15 दिन तक रोजाना चार घंटे ट्रैफिक नियमों की ट्रेनिंग दिए जाने का निर्देश दिया है। आरोपी ने जेल भेजने के बजाय वैकल्पिक सजा के तौर पर ट्रेनिंग पर भेजने की पेशकश की थी। लेकिन अदालत ने उसका ड्राइविंग लाइसेंस छह माह तक निलंबित रखने के फैसले को कायम रखा है। इस आदेश की कॉपी ट्रैफिक पुलिस को भेजने का निर्देश अदालत ने दिया है।
