झूले में मौत से जूझती जिंदगियां

खराहल (कुल्लू)। मनाली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 17 मील में 19 वर्ष बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। पुल का निर्माण कार्य लंबित पड़ने से आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को भारी दिक्कत हो रही है। पुल न बनने से क्षेत्र के सैकड़ों लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए झूले का सहारा लेना पड़ रहा है। आलम यह है कि 1995 में ब्यास नदी में आई भीषण बाढ़ पुल को बहाकर ले गई है। लोस की चुनावी फि जा में पुल का न होना मुख्य मुद्दा बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारें बदलती गईं लेकिन ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या को किसी ने दूर नहीं किया। अब ग्रामीणों ने दो टूक कह दिया है कि पहले पुल का निर्माण करने का पक्का वायदा करो, फिर वोट देंगे। क्षेत्र के आसपास के लोगों के लिए ब्यास नदी पर लगा झूला ही एक मात्र साधन है। दर्जनों गांवों के लोग इसी झूले से रोजमर्रा का सामान अपने घरों तक पहुंचाते हैं। ऐसे में कई बार झूले में हादसे की आशंका बनी रहती है। गत साल इस झूले से एक व्यक्ति नदी में जा गिरा था और मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। इतना ही नहीं, दो साल पूर्व भी एक अनाथ आश्रम के छात्र की मौत हो चुकी है। स्कूल में अध्ययनरत बच्चों के लिए भी झूला ही एकमात्र साधन है। हरिपुर कॉलेज सहित गंजा विहाल में एक अनाथ आश्रम स्कूल के बच्चे भी इसी झूले से आरपार होते हैं। गजां विहाल के आश्रम की प्रभारी सुदर्शना ठाकुर ने कहा कि 17 मील के झूले से हमेशा गिरने का खौफ बना रहता है। कई दफा यहां नदी में गिरकर जानमाल का नुकसान भी हुआ है। उन्होंने कहा कि अनाथ आश्रम के 12 बच्चे इसी झूले में बैठ कर शिक्षा ग्रहण करने के लिए जाते हैं। ग्रामीण राम नाथ, सुनील, लाल चंद, सुरेंद्र, पूर्ण चंद, उत्तम चंद आदि का कहना है कि 19 साल बीत जाने के बाद भी किसी भी पार्टी ने पुल का निर्माण नहीं किया है। चुनाव के वक्त ही लोगों को आश्वासन के सब्जबाग दिखाए जाते हैं। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता ललित भूषण कहते हैं कि पुल का शिलान्यास किया गया है। उन्होंने कहा कि तमाम कागजी औपचारिकताएं पूरी होने बाद जल्द पुल का कार्य आरंभ किया जाएगा।

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