
ऊना। दिन : बुधवार। समय : सुबह 11.55 बजे। अमर उजाला की टीम क्षेत्रीय अस्पताल परिसर पहुंची। बेतरतीब खड़े वाहनों को देखकर ही आभास होता है कि अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। जैसे ही टीम ने भीतर प्रवेश किया तो कई मरीज और तीमारदार डाक्टरों के इंतजार में ओपीडी के बाहर इधर उधर लेटे हुए देखे गए। इंतजार इतना लंबा खिंच गया कि कइयों की आंख भी लग गई। नजदीक से गुजरते किसी व्यक्ति के चलने की हल्की सी आहट सुनकर भी वे लोग इस आशा से उठ बैठते कि कहीं डाक्टर तो नहीं आए। अस्पताल में जिस ओपीडी में डाक्टर बैठे थे, वहां बाहर भीड़ लगी थी। उन्हें कतारबद्ध करने के लिए न तो कोई सुरक्षा कर्मी था और न ही अस्पताल का कोई अन्य कर्मचारी। जब हमारी टीम दूसरे फ्लोर पहुंची तो वहां हालात बेकाबू थे। गैलरी में न तो रोशनी थी और न ही पंखे चल रहे थे। चिकित्सकों के इंतजार में गैलरी में घुप अंधरे में खड़े मरीज और तीमारदार पसीने से तर हो गए। यहां भी कई फर्श पर बैठे हुए थे। अस्पताल का माहौल देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे हम किसी सराय में आ गए हों। गायनोकोलोजिस्ट के दरवाजे के बाहर भीड़ अन्यों की अपेक्षा ज्यादा थी। इनमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं शामिल थीं। बैठने को कुर्सियां और बैंच न होने के कारण कई महिलाएं फर्श पर बैठ गई थीं।
मरीजों के साथ आए तीमारदारों में ललड़ी के राकेश कुमार, हरोली से रमनदीप, अचलपुर से स्वर्णा, जसविंद्र कौर, नसीब कौर, कठार क्षेत्र की रज्जो देवी, ऊना की सीमा, ममता, ऋतु, शशिबाला, संतोषगढ़ की सुनीता, अनुराधा, सोमा रानी और किरन कांता आदि ने बातचीत के दौरान बताया कि सुबह दस बजे से वे अस्पताल पहुंची हैं। ओपीडी के बाहर खड़े होकर उन्हें दो घंटे से अधिक समय हो गया। अभी तक चिकित्सक नहीं आए।
कैंटीन में बैठने की व्यवस्था नहीं
डाक्टरों का इंतजार कर रहे कई मरीज और तीमारदार गैलरी में ही फर्श पर बैठकर भोजन कर रहे थे। सुबह अस्पताल पहुंचे यह लोग घर से ही डिब्बों में खाना लेकर आए थे। इन लोगों से जब पूछा कि आप कैंटीन में बैठकर भोजन क्यों नहीं करते। जवाब मिला, कैंटीन में बैठने की व्यवस्था ही नहीं है। दरअसल कैंटीन में जहां बैठने का प्रावधान था, वहां पर लैब खोल दी गई है।
सीएमओ छुट्टी पर
इंडियन बुलेटिन की टीम जब सीएमओ के दफ्तर गई तो वहां कुर्सी खाली थी। साथ लगते जिला स्वास्थ्य अधिकारी के दफ्तर में भी कोई नहीं था। सामने वाले कमरे में बैठे एक कर्मचारी ने बताया कि दोनों साहब छुट्टी पर हैं। चार्ज डा. मुकेश के पास हैं। वह मीटिंग के लिए डीसी दफ्तर गए हैं।
क्यों खींच रहे हो फोटो
हमारी टीम जब पहले फ्लोर में घुप अंधरे में बैठे पसीने से तर हुए लोगों के साथ बात कर रही थी तो कुछ सुरक्षा कर्मी पहुंचे और पूछने लगे फोटो क्यों खींच रहे हो। हमने उनकी बात का जवाब दिए बिना पूछ लिया कि भाई साहब लोगों की भीड़ को कतारबद्ध क्यों नहीं करते? जवाब मिला, जब डाक्टर साहब आएंगे तो देखेंगे। हमने पूछा यहां लाइट क्यों नहीं है। जवाब मिला, कुछ फाल्ट होगा।
क्या कहते हैं सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जब फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं मेडिकल लीव पर हूं। ऊना पहुंचकर ही बात कर पाऊंगा।
