जालंधर के शेरों ने ‘चीते’ की मदद से दिखाया कमाल

गौचर हैलीपैड से: जालंधर के 4 शेरों ने चीते की मदद से अपनी जान की बाजी लगाकर हजारों लोगों को मौत के मुंह से बचा लिया लेकिन इनका मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है। ये चारों बस हर वक्त मौसम के ठीकहोने की दुआ करते रहते हैं ताकि जैसे ही मौसम सही हो ये फिर लोगों को बचाने निकल पड़ें। घंटों हैलीकॉप्टर उड़ाने के बाद भी इनकेचेहरे पर थकान नाम की कोई चीज नहीं है। अपने कुछ साथियों की हैलीकॉप्टर क्रैश में मौत पर इनका कहना है कि हमें अपने साथियों के मारे जाने का बहुत दुख है पर खौफ कतई नहीं।

यह कहना है जालंधर के आर्मी बेस के 4 पायलटों मनोज त्रिपाठी, उत्तम, जितेन्द्र व नितिन चौधरी का। जालंधर केये शेर पूरी शिद्दत के साथ जुटे हैं विभीषिका में फंसे लोगों केसाथ। मनोज त्रिपाठी ने बताया किसेना के हैलीकॉप्टर चीते की मदद से उन्होंने हर दिन दर्जनों लोगों को केदार घाटी से निकाल कर गौचर हैलीपैड पहुंचाया। वह अब तक 200 से अधिकलोगों को निकाल चुके हैं। केदार घाटी में बिना किसी हैलीपैड के यहां-वहां पहाड़ों में कहीं भी सही जगह देखकर हैलीकॉप्टर को उतारकर लोगों को निकालते थे।

नितिन चौधरी ने कहा किपिछले 6-7 दिनों में सैंकड़ों लोगों को केदार घाटी व बद्रीनाथ से निकाला है। इस मिशन में थल सेना के ध्रुव हैलीकॉप्टर व चीते ने पूरा साथ दिया। उन्होंने बताया किवह हैलीकॉप्टर लेकर निकलते तो देखते थे किलोग बड़ी उम्मीदों से उनके हैलीकॉप्टर की ओर देख रहे हैं। वह कोशिश करते थे कि जैसे भी लोगों को बचाया जाए। कहीं-कहीं तो छोटी-सी जगह पर हैलीकॉप्टर को उतारकर लोगों को बचाया।

पायलट उत्तम ने बताया कि कहीं-कहीं तो हैलीकॉप्टर उतारने की जगह नहीं मिली तो लिफ्ट करके लोगों को ऊपर हैलीकॉप्टर तक पहुंचाया। लिफ्ट करने के लिए एकलोहे की तार नीचे भेजी जाती है, फिर उसके सहारे एकजवान पीड़ित को हैलीकॉप्टर तक पहुंचाता है। बस अब तो भगवान से यही प्रार्थना है किमौसम साथ दे दे तो सबको बाहर निकाल लिया जाए। पायलट जितेन्द्र ने बताया किरोज सुबह दिन निकलने के साथ ही वे लोग हैलीकॉप्टर लेकर निकल पड़ते हैं और शाम तकयही चलता है। कई बार तो ऐसा हुआ किगौचर में तो मौसम ठीकथा लेकिन गौरीकुंड या फिर केदार घाटी में मौसम सही नहीं होने के कारण वे नीचे उतर ही नहीं पाए।

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