जर्जर भवन बने लोगों के लिए खतरा, हादसे का अंदेशा

ऊना। नगर परिषद के विभिन्न वार्डों में कई भवन जर्जर हो चुके हैं। हालत यह है कि भूकंप का हल्का सा झटका भी ऊना शहर के लिए घातक हो सकता है। 80 से 100 वर्षों से भी ज्यादा पुराने यह जर्जर भवन किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं,लेकिन प्रशासन और नप इन जर्जर भवनों को लेकर अभी तक संजीदा नहीं दिख रहे हैं। नगर परिषद में पिछले कई वर्षों से भवन गिराने की प्रक्रिया लटकी हुई है। नप बैठकों में मात्र प्रस्ताव एवं लोगों को नोटिस देने के बाद नप की कार्रवाई शून्य ही रही है। कई वर्षाें से खाली चल रहे इन भवनों की सूरत अब भूत बगलों की तरह हो गई है। लंबे समय से इन भवनों में कोई नहीं रह रहा है। खंडहर हो चुके भवनों को गिराने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की गई है। शहर के वार्ड पांच, छह, सात, आठ, ग्यारह, दो में सबसे ज्यादा जर्जर अनसेफ भवन हैं, जो रिहायशी भवनों के लिए भी खतरा हैं। बरसाती पानी से जर्जर भवनों की दीवारें फूल गई हैं। तीन चार वर्ष पूर्व भवनों को गिराने के लिए नप और प्रशासन आगे आए थे, लेकिन मात्र नोटिस देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

असुरक्षित भवन गिराएं
स्थानीय लोगों में तिलक राज मैहरा, शिव कुमार, अरुण कुमार, पवन कुमार, गौरव अरोड़ा, रणजीत सिंह, अश्वनी कुमार, कार्तिक ठाकुर, रमन कुमार, नीतिका शर्मा, अंजली शर्मा, कुमारी ऋतु, नेहा अग्रवाल, अजय शर्मा, दिनेश कुमार, राहुल धीमान का कहना है कि शहर में कई जर्जर भवन हैं, जिनकी हालत काफी दयनीय है। प्रशासन और नप इन अनसेफ घोषित किए भवनों को गिराए।

अधिकारी कहते हैं
नगर परिषद के एसडीओ सुरेश चौहान का कहना है कि जर्जर भवनों के मालिकों को नोटिस भेजे गए हैं। इस संदर्भ में राजस्व विभाग के अधिकारियों से भी मुआयना करवाया जा रहा है। जल्द ही उचित कार्रवाई अमल मे लाई जाएगी।

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