
कुल्लू। पुरातन गांव मलाणा के आराध्य देवता जम्दाग्नि ऋषि ने तीर्थ स्थल मणिकर्ण में शाही स्नान किया। स्नान करते वक्त दर्जनों बकरों की बलि भी दी गई। इस मौके पर देवता के नए कारकूनों का देव नियमों अनुसार स्नान करवाया गया।
धार्मिक नगरी मणिकर्ण की चार पहाड़ियों के बीच बसा पुरातन गांव मलाणा देव नियमों पर चलता है। यहां हर वर्ष पारंपरिक देव नियमों से नए कारकूनों का चयन किया जाता है। इसके बाद मणिकर्ण तीर्थ स्थल में स्नान कर उन्हें शुद्ध किया जाता है। फिर देव कार्यों का कार्यभार सौंपा जाता है। मलाणा गांव के जम्दाग्नि ऋषि 400 हारियानों के साथ वीरवार को तीर्थ स्थल मणिकर्ण के लिए रवाना हुए। रविवार को देवता ने नव कारकूनों संग तीर्थ स्थल में डुबकी लगाई। जैसे ही देवता ने गूर के माध्यम से तीर्थ स्थल में शाही स्नान किया तो 13 बकरे की बलि दी गई।
जम्दाग्नि ऋषि के कारदार शुक्रु राम और हारियान मोती राम ने बताया कि हर वर्ष देवता इसी महीने देव कार्यों के लिए नए कारकूनों का चयन करते हैं। चयन के बाद मणिकर्ण में जाकर शाही स्नान कर कारकूनों की शुद्धि की जाती है। इस बार भी रविवार को यह देव रस्म देव नियमों अनुसार निभाई गई। वीरवार को देवता शाही स्नान कर देवालय लौटेंगे। कारकूनों का कहना इस दौरान देवता के हारियान क्षेत्र छलाल, कटागला, रशोल, गौहर आदि गांवों में बकरों की बलि के साथ देवता का स्वागत करेंगे।
