
हरिपुर (कुल्लू)। पुरातन गांव मलाणा के आराध्य देवता जम्दग्नि ऋषि हारियानों संग देव तौठ यानी देव बर्तन में विराजमान होकर ऊझी घाटी के दौरे पर निकले थे। इस दौरान देवता के पारंपरिक देव नियमों अनुसार पांच दर्जन हारियानों ने देवता के लिए अनाज एकत्रित किया। हारियानों ने सोलंग गांव से अरछंडी गांव तक दौरा किया। ऊझी घाटी के लोगों ने देवता जम्दगिभन ऋषि को अनाज भेंट किया। वहीं, हारियानों के लिए देव भोजन का आयोजन भी किया। जब मलाणा में फागली उत्सव होता है तो इस दौरान इस अनाज को समारोह में शरीक हजारों भक्तों को प्रसाद के रूप में खिलाया जाता है।
ऐतिहासिक गांव मलाणा के हारियान देवता के आदेशानुसार हर वर्ष पौष माह में अनाज गुराही के लिए ऊझी घाटी का दौरा करते हैं। परंपरा अनुसार पौष संक्रांति के बाद हारियान देवालय से निकले थे। रविवार को देवता के कारकून वापस देवालय लौटे हैं। इस दौरान पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाओं ने भी देवता के लिए अनाज एकत्रित किया। सावन और फाल्गुन महीने में अगर ऊझी घाटी के लोग मलाणा गांव दर्शन के लिए नहीं पहुंचते हैं तो देवता जम्दगिभन ऋषि हारियानों को उनके घर जाने के निर्देश देेते हैं। हारियान इस दौरे के दौरान देवता के हारियानों को अपने घर देव रूप से बुलाते हैं। देवता के मुख्य कारकून कठियाड़ा शाडू राम और माघू राम ने बताया कि देवता के निर्देश अनुसार साठ के करीब हारियानों ने ऊझी घाटी के सोलंग से लेकर अरछंडी तक सैकड़ों घरों में अनाज एकत्रित किया। उन्होेंने बताया कि हर वर्ष देवता इस महीने तौठ यानि देव बर्तन के साथ ऊझी घाटी की परिक्रमा करते हैं। इस दौरान ऊझी घाटी के लोग मलाणा के हारियानों को देवता का रूप मानते हैं।
