
ऊना। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रतन सिंह ठाकुर ने कहा कि बच्चों के साथ हो रही आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए बच्चों को स्वयं भी सजग होना होगा और ऐसी स्थिति में तुरंत अभिभावकों या अध्यापकों को सूचित करना चाहिए। वह बुधवार को स्थानीय राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (कन्या), ऊना में उपमंडलीय विधिक साक्षरता समिति की ओर आयोजित बाल दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल अपराधों में संलिप्त बच्चों के लिए विशेष न्यायालय गठित किए गए हैं और यह सुनिश्चित किया जाता है कि अपराधी बच्चे बाल सुधार गृह में रह कर अपनी आदतों को सुधारने के बाद समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आदर्श नागरिक बन सकें। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं अध्यक्ष उपमंडलीय विधिक साक्षरता समिति कृष्ण कुमार ने कहा कि बच्चों को चाचा नेहरू की जीवनी से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। कृष्ण कुमार ने कहा कि शिक्षण संस्थानों के सौ मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करना चाहिए। न्यायिक दंडाधिकारी अमित मंडयाल ने बाल श्रम कानून तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम की जानकारी दी तथा कहा कि शिक्षण संस्थानों में रैगिंग एक अपराध है तथा इसे रोकने के लिए कानून में व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त अधिवक्ता अजय कुमार ने सूचना का अधिकार व मोटर वाहन अधिनियम, अधिवक्ता सीमा शर्मा ने घरेलू हिंसा अधिनियम के बारे में जानकारी दी।
