छात्राओं के आंदोलन में कूदे अभिभावक

ऊना। हिमकैप्स लॉ एंड नर्सिंग कालेज के मैस में खराब भोजन परोसे जाने के मामले में छात्राओं की हड़ताल चौथे दिन में प्रवेश कर गई। बुधवार को छात्राओं के विरोध के बाद अभिभावक भी आंदोलन में शामिल हो गए। ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर व हमीरपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग दो दर्जन अभिभावकों ने छात्राओं से मुलाकात कर हालात जाने और इसके बाद रोती बिलखती एवं सहमी हुई छात्राओं के दर्द को देखते हुए अभिभावक कालेज प्रबंधन पर टूट पडे़। इसके चलते दोनों पक्षों में तनावपूर्ण माहौल के बीच बहस भी हुई। इस बीच बाहर छात्राएं हड़ताल पर डटीं नारेबाजी करती रहीं। इससे कालेज प्रबंधन भी पहले आक्रामक रहा और बाद में छात्राओं एवं अभिभावकों के विरोध के चलते कुछ नरम पड़ा। हड़ताल पर बैठी छात्राओं में से तीन की हालत मौके पर ही खराब हो गई। इनमें अलका, विनीता एवं सविता शामिल हैं। इनमें से विनीता एवं अलका की गंभीर हालत को देखते हुए 108 एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल में भेजना पड़ा, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। इससे अभिभावक एवं छात्राएं और तैश में आ गए और मामला काफी भड़क गया। मैस में खराब खाना मिलने एवं ठेकेदार का व्यवहार ठीक न होने की शिकायत कर रही छात्राओं की शिकायत को उस समय बल मिला, जब कालेज प्रबंधन ने भी यह स्वीकार किया कि मैस में खाने की गुणवत्ता कम है और ठेकेदार का व्यवहार मैत्रीपूर्ण नहीं है। इस पर ठेकेदार को बदलने की मांग पर अड़ी छात्राओं और अभिभावकों ने तुरंत निर्णय लेने को कहा। नहीं तो उनके पैसे वापस करने की मांग की। प्रबंधन की तरफ से समिति के ऑनरेरी सचिव एसपी शर्मा ने अभिभावकों से बातचीत की। उनके साथ कालेज प्रबंधन के निदेशक मंडल के छह सदस्य एवं दो पूर्व चेयरमैन भी मौजूद रहे। कांगड़ा से आए एक अभिभावक कर्मचंद तो छात्राओं को रोते हुए और बीमार देखकर हुए एकाएक तैश में आए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि उनकी बेटी को कुछ हुआ तो वे कालेज प्रबंधन को माफ नहीं करेंगे।

दो माह से प्रशासन खामोश क्यों : अभिभावक
ऊना। छात्राओं के समर्थन में आए अभिभावक रमेश कुमार, नरेश शर्मा, राजकुमार, राम किशन, विनय कुमार व कर्मचंद सहित अन्य अभिभावकों के गर्म तेवरों ने कालेज प्रबंधन पर खराब खाना देने और छात्राओं की कोई सुध न लेने पर खूब हंगामा किया। उन्होंने कहा कि तीन दिन से मामला चल रहा है और दो माह पहले से शिकायतें दी जा रही हैं। प्रशासन खामोश क्यों रहा है। इस पर बात को बिगड़ता देख कालेज प्रबंधन नर्म पड़ा और उन्होंने छात्राओं एवं अभिभावकों की पूरी बात सुनी तथा समस्या के समाधान के बारे में आश्वस्त किया। अभिभावक इस बात पर अड़े हुए थे कि फैसला आज और अभी होना चाहिए, नहीं तो छात्राएं यहां नहीं पढ़ेंगी।

Related posts