चुनावी बहिष्कार के लिए नेता जिम्मेदार

कुल्लू। लोग अब नेताओं के आश्वासनों से तंग आकर लोकतंत्र प्रणाली से मुंह मोड़ने लगे हैं। कुल्लू और लाहौल के चार गांवों के लोगों ने मंडी लोकसभा उपचुनाव में इस बार मतदान नहीं किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा के लिए वे हर दर पर गए लेकिन कुछ नहीं मिला। ऐसे में किस पर भरोसा करके वोट दें। इन चारों गांवों में सैकड़ों वोटर हैं। चुनाव के बहिष्कार के पीछे सड़क सुविधा न मिलना ही सबसे बड़ा मुद्दा है।
लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता उन्हें आश्वासन देते हैं लेकिन इसके बाद सब कुछ भूल जाते हैं। इस कारण सभी ग्रामीणों ने मिलकर चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। मणिकर्ण घाटी की बरशैणी पंचायत के पुलगा गांव के करीब 346 वोटरों ने भी मतदान नहीं किया। बरशैणी पंचायत के प्रधान पूर्णचंद ने बताया कि वे गांव वालों को समझाने गए थे लेकिन वे नहीं माने। गांव वाले लंबे समय से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं। स्कूल को मिडिल करने की मांग लोगों ने पहले नहीं उठाई थी। मनाली की पलचान पंचायत के गांव सोलंग के करीब 265 वोटरों ने भी चुनाव का बहिष्कार किया।
सोलंग के देवी चंद, कर्मचंद और टिक्कम राम ने बताया कि सड़क सुविधा न मिलने से खफा ग्रामीणों ने शनिवार रात बैठककर चुनाव के बहिष्कार करने का ऐलान किया। कहा कि वे कई सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन नेताओं ने उन्हें केवल आश्वासन ही दिए। लाहौल स्पीति के उदयपुर की नालडा पंचायत के नालडा और जसरथ गांव के 347 मतदाताओं ने भी मतदान नहीं किया। नालडा गांव के लोग पुल का निर्माण कार्य इस साल शुरू न होने से खफा हैं। जसरथ गांव के लोग सड़क सुविधा न मिलने से गुस्सा हैं। वहीं मंडी जिला के करसोग क्षेत्र के मजान गांव के 84 मतदाताओं ने भी चुनाव का बहिष्कार किया है।

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