
सिहुंता (चंबा)। ग्राम पंचायत मोतला में चल रही आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी चपरासी के सहारे चल रही है। इस डिस्पेंसरी में न तो चिकित्सक है और न ही फार्मासिस्ट है। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं है। ऐसे में मरीजों को इस डिस्पेंसरी का उचित लाभ नहीं मिल रहा है। यह डिस्पेंसरी 1989 में सिहुंता से धुलारा के लिए शिफ्ट की गई थी। उस दौरान डिस्पेंसरी में छह बिस्तरों की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा डिस्पेंसरी में एक चिकित्सक, एक-एक महिला स्वास्थ्य कर्मचारी, एक दाई और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तैनाती की गई थी। रोजना इस डिस्पेंसरी में ग्राम पंचायत धुलारा, मोतला, रजेईं, काथला, खकरोटी गट्टा व जिला कांगड़ा के कुछ गांवों के लोग इलाज करवाने पहुंचते थे। यहां पर हर रोज करीब 150 से 200 लोग अपना चेकअप करवाते थे, लेकिन कुछ समय के बाद इसे मोतला के लिए शिफ्ट कर दिया गया। डिस्पेंसरी के मोतला शिफ्ट होने के बाद उसकी स्थिति काफी खराब हो गई। स्थानीय पूर्व प्रधान एवं व्यापार मंडल के प्रधान सुरेंद्र महाजन ने बताया कि आज के समय इस डिस्पेंसरी की हालत दयनीय बनी हुई है। इसमें न तो स्टाफ है और न ही इसका अपना भवन है। इसके कारण मरीजों को इस डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्थानीय पंचायत के करतार सिंह, राजीव, राजेंद्र, दिलाबर सिंह, जीवन कुमार, पवन गोस्वामी, सबीना सोनी, लक्की महाजन और देस राज ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि धुलारा में आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी की जगह सब सेंटर खोला जाए। इससे स्थानीय लोगों को उपचार के लिए सुविधा मिलेगी।
