घूस मामले में पुलिसकर्मी पर नहीं चलेगा मुकदमा

नई दिल्ली। घूस लेने के मामले में ट्रैफिक पुलिसकर्मी के स्टिंग ऑपरेशन की सीडी नहीं होने के कारण दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी। तीस हजारी स्थित विशेष न्यायाधीश नरोत्तम कौशल ने पुलिस की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में स्टिंग ऑपरेशन की सीडी नहीं होने के बाद भी पुलिसकर्मी पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं में आरोप तय करना सही नहीं होगा। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी का इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश करना सही है। मामले की दोबारा जांच के निर्देश से भी कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि स्टिंग ऑपरेशन की सीडी पुलिस को नहीं मिली है।
बता दें कि आरटीवी ऑपरेटर शीश पाल तोमर ने नवंबर 2009 में पुलिस को शिकायत दी थी। उसने बताया था कि वह नंद नगरी से अजमेरी गेट के बीच आरटीवी चलवाता है। यमुनापार क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस वाले घूस की मांग कर उसे परेशान करते हैं। तोमर पुलिस को घूस नहीं देना चाहता था। इसलिए उसने छोटा अखबार चलाने वाले राजबीर बंसल से संपर्क किया और उसकी मदद से अगस्त 2009 में घूस लेने वाले ट्रैफिक पुलिसकर्मी का स्टिंग ऑपेरशन किया था लेकिन स्टिंग के बाद बंसल ने तोमर को उसकी सीडी देने से मना कर दिया। सीडी न मिलने पर तोमर ने आरोप लगाया कि बंसल ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को ब्लैकमेल किया। उसने सीडी को नष्ट करने का झांसा देकर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से रुपयों की वसूली की। इसके बाद तोमर ने अक्टूबर 2009 में एक और स्टिंग ऑपरेशन किया। इसमें ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने पिछले स्टिंग की बात स्वीकार की थी। उसने इस बातचीत की सीडी शिकायत के साथ लगाई थी। जांच के दौरान तोमर व बंसल से इस संबंध में पूछताछ की गई। दोनों ने एक दूसरे पर सीडी होने का आरोप लगाया लेकिन किसी ने भी पुलिस को वह सीडी नहीं दी। उनके घर से बरामद हार्ड डिस्क व सीडी से भी पुलिस को कुछ नहीं मिला।

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