
देहरादून। महिलाएं घर में भी महफूज नहीं हैं। कुछ अपने रिश्तेदारों तो कुछ परिजनों के हाथों ही यौनिक हिंसा की शिकार हुई हैं। यह बात उभरकर सामने आई महिला समाख्या की ओर से महिलाओं के विरुद्ध यौनिक हिंसा विषय पर मंगलवार को आयोजित की गई गोष्ठी में। सहारनपुर रोड स्थित एक होटल में हुई इस गोष्ठी में डा. संध्या जोशी की सर्वे रिपोर्ट भी पेश की गई। सर्वे में 998 महिलाओं में से 971 पर हिंसा की बात सामने आई।
इनमें अधिकांश की संख्या 20 वर्ष से 30 वर्ष के बीच थी। प्रश्नोत्तरी के आधार पर हुए इस सर्वे में महज 27 महिलाओं ने किसी तरह की हिंसा न होने की बात स्वीकारी। सर्वे के लिए उत्तराखंड राज्य के प्रत्येक जिले से 20 से अधिक महिलाओं का सैंपल लिया गया था। गोष्ठी के दौरान महिलाओं के प्रति होने वाली यौनिक हिंसा के प्रति मानसिकता बदले जाने के लिए कार्य करने का निश्चय हुआ।
तय हुआ कि इसमें युवा अहम भूमिका अदा कर सकते हैं, इसलिए उनके लिए तैयार किए जाने वाले पाठ्यक्रमों में नैतिक शिक्षा को आवश्यक रूप से शामिल किया जाए। उनमें लिंगभेद को पनपने न दिया जाए। इस दौरान महिला समाख्या की गीता गैरोला, पहल की कमला पंत, जाह्नवी तिवारी आदि ने विशेष रूप से अपनी बात रखी।
