घरेलू विमानों की उड़ानों का प्रस्ताव ठंडे बस्ते

पिंजौर: पिंजौर बसौलां के एयरपोर्ट को अपग्रेड कर यहां से घरेलू विमानों की उड़ानों के प्रस्ताव को सरकारी उपेक्षा के चलते ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जहां एक ओर सरकारी अनदेखी का शिकार पिंजौर का नागरिक उड्डयन एंव प्रशिक्षण केन्द्र को उसी समय अपग्रेड कर एक किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी को तीन किलोमीटर तक करने पर विचार किया गया था जब पिंजौर में हुडा की ओर से 31 सैक्टरों को विकसित करने का मास्टर प्लान तैयार किया गया था लेकिन अभी यहां पर केवल चार्टर प्लेन ही उतर सकता है।

इसके अलावा इस समय करीब 15 छात्र है जबकि जरूरत कर से कम 3 की ओर है। प्रशिक्षण लेने के लिए आने वाले विघार्थियों को एक ही जहाज होने के कारण लम्बा इंतजार करना पड़ा है कई छात्र इसलिए आते भी नहीं जब उन्हें पता चलता है कि एक ही जहाज है। नागरिक उड्डयन विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एयरपोर्ट में घरेलू उड़ानों के उतरने में उनके रास्ते में आने वाले बिजली के बड़े टावरों अड़चन बने हुए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट की हवाई पट्टी से मात्र एक-डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर सुखोमाजरी और धमाला गांवों के बीच में से भाखड़ा व्यास मैनेजमैंट बोर्ड की 40 के.वी. की गुजर रही है। जिन्हें हटाए जाने का प्रस्ताव था लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका जिससे हवाई पट्टी की लंबाई को बढ़ाया जाना था।

हरियाणा सरकार के प्रदेश में तीन उड्डयन केन्द्र हैं जिसमें से करनाल और हिसार केन्द्र में ही ध्यान देकर वहां पर घरेलू एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी गई। लेकिन पिंजौर का उक्त केन्द्र कई मायनों में सरकार के लिए नोट बनाने की मशीन बन सकता है क्योंकि एक तो यह चंडीगढ़ के अंर्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट के एकदम नजदीक है दूसरा हिमाचल प्रदेश के रास्ते में पड़ता है। क्योंकि जहां एक ओर चंडीगढ़ एयरपोर्ट अधिक व्यस्त होने के कारण वहां पर न तो घरेलू विमानों को उतरने में दिक्कतें आती हैं वही हैंगर की सुविधा भी कम ही मिलती है।

Related posts