
केलांग। रोहतांग दर्रा होकर आवाजाही के दौरान प्रशासनिक अनुमित और ग्रीन टैक्स के विरोध में सोमवार को केलांग में पंचायतीराज की तीनों संस्थाओं के साथ होटल और टैक्सी यूनियन ने भी विरोध रैली निकाली। ट्रिब्यूनल के आदेश पर याचिका दायर करने वाली गैर सरकारी संस्था लाहौल स्पीति जनजातीय कल्याण समिति ने भी इसमें शिरकत की। छह माह की बर्फ की कैद से मुक्त हुए जनजातीय लोगों को अभी कुछ ही दिन हुए नहीं कि घर आने के लिए यहां की जनता पर परमिट की औपचारिकता डाल दी गई है। किसानों को आशंका है कि आने वाले दिनों में इस फरमान के कारण मटर, गोभी और आलू की नकदी फसलों को मंडियों तक पहुंचाने भी दिक्कत हो सकती है। जिला परिषद सदस्य एवं याचिकाकर्ता संगठन के महासचिव रिगजिन हायरपा ने कहा कि घर आने के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय लोगाें को इस फरमान के बाद ऐसा आभास होता है कि वे लोग हिंदुस्तान नहीं, बल्कि किसी और मुल्क के बाशिंदे हैं। उनके अनुसार कल्याण समिति इस आदेश के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर चुकी है। विरोध रैली के बाद पंचायत प्रतिनिधियों, होटल एसोसिएशन और टैक्सी यूनियन से जुड़े लोगों ने बैठक का आयोजन किया। पंचायत संघ अध्यक्ष वीर सिंह, पूर्व अध्यक्ष सुरेश कुमार, खंगसर प्रधान सुंदर लाल, जिप सदस्य शशि किरण तथा मानदासी ने कहा कि आज का प्रदर्शन महज सांकेतिक था। इन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यही परमिट और शुल्क प्रथा बंद न की गई तो इस आंदोलन के साथ-साथ लाहौल स्पीति और पांगी-किलाड़ की आम जनता को जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह कैसा इंसाफ है कि मजे पर्यटक लूटे और सजा जनजातीय लोगों को भुगतनी पडे़। सुरेश ने कहा कि डॉ. परशीरा की रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहतांग पर आवाजाही करने वाले महज पांच फीसदी वाहन ही जनजातीय लोगों के होते हैं। उन्होंने कहा की लाहौल के महिला मंडलों को इस आंदोलन से जोड़ा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, मुख्य सचिव और डीसी कुल्लू को ज्ञापन प्रेषित किया। विरोधी रैली में टैक्सी यूनियन के नोरबू, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष टशी कारपा और व्यापार संघ के अध्यक्ष शेर सिंह भी मौजूद रहे।
