
कुल्लू। नेता जी, हमारे गांव को जोड़ने वाले पुल का निर्माण आखिर कब होगा? कब तक झूले का सहारा लेकर अपने घर जाते रहेंगे? यह सवाल उठा रहे हैं मनाली विधानसभा क्षेत्र के लोग। दरअसल 17 मील पर 18 सालों से पुल नहीं बन पाया है। लोग एक झूले के सहारे नदी को पार करते हैं। इससे अक्सर हादसों की आशंका रहती है। इस वजह से आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रों के सैकड़ों लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए एकमात्र झूले का सहारा लेना पड़ रहा है। 17 मील के साथ सटे आसपास के गांवों के लोगों को ब्यास नदी के ऊपर लगा झूला इधर उधर जाने के लिए एकमात्र साधन है। कुल्लू के दर्जनों गांवों के लोगों को इसी झूले से रोजमर्रा का सामान भी घरों तक पहुंचाना पड़ता है। 18 सालों से इंतजार कर रहे मनाली क्षेत्र के लोगों ने चुनावी बेला पर यह एक बड़ा मुद्दा नेताओं के सामने उठाया है। स्कूल में अध्ययन बच्चों के लिए भी यह पुल एक मात्र साधन है। हरिपुर कालेज में पड़ने वाले विद्यार्थी भी यहीं से गुजरते हैं।
गजां बिहाल में स्थित अनाथ आश्रम स्कूल के बच्चे भी इस पुल से ही गुजरते हैं। अनाथ आश्रम की मुख्य सुदर्शना ठाकुर कहती हैं कि 17 मील के झूले में नदी पा करते समय गिरने का डर रहता है। कई दफा यहां नदी में गिरकर जानमाल का नुकसान भी हुआ है।
पुल न होने से जजां, राण, तरजां, सरदेई, हरिपुर, डोभी, डोभा और मनसारी के लोग हर रोज परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अनाथ आश्रम के 13 बच्चे इसी झूले से मनाली पढ़ने जाते हैं। आश्रम में 35 बच्चे भी इसी झूले से आरपार होते हैं। ग्रामीण सुरेंद्र, रामनाथ, सुनील, सीमा, किरणा, पूर्ण चंद, अनूप और राजकुमार ने कहा कि वर्ष 1995 से पहले यहां पैदल चलने योग्य पुल था। 1995 में ब्यास नदी में आई बाढ़ पुल को बहाकर ले गई। 18 साल बीत जाने के बाद भी किसी भी पार्टी ने पुल का निर्माण नहीं करवाने के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए। चुनाव के वक्त सिर्फ लोगों आश्वासन देते रहे लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। मनाली विस क्षेत्र के विधायक गोविंद ठाकुर ने कहा कि पुल निर्माण की सभी औपचारिकताएं पूरी कर पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
