गम-ए-आलम में डूबा क्यों हिंदोस्तां है!

ऊना। सहमे-सहमे हैं परिंदे, गुलशन क्यों वीरान है, गम ए आलम में डूबा आज क्यों हिंदोस्तां है। चनी विस्मिल की यह पंक्तियां गूंजते ही बचत भवन का सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से मंगलवार को बचत भवन में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कई नामी साहित्यकारों और कवियों ने भाग लिया। ऊना के जिला भाषा अधिकारी त्रिलोक सूर्यवंशी क ो भी विदा किया गया। सूर्यवंशी का शिमला के लिए तबादला हुआ है। कवि सम्मेलन में डा. बाल कृष्ण सोनी ने ..चाहते हो दोस्तो यदि कुछ है जीना, डा केएल बैंस ने ..बड़ा ही आसां है दिल से दिल्लगी करना, प्रेम भाटिया ने अध्ययन भजन और हंसना, राम कृष्ण ने मंदे कर्म कमाणो हट जा, प्रभु भक्ति दे विच डट जा, अंबिका दत्त ने ..भरी दोपहरी में मैं जब, एसडी शर्मा सहोड़ ने ..आप ने जब भी जलाई झुग्गियां, रोई तक मिलकर सारी झुग्गियां, राजीव शर्मन ने ..भारत की रेल देवी अंब को अंबिका नगर बनाने आई है, बलविंद्र घनारी ने ..दुनिया में रहा, दुनिया न रही, गीता सरोच ने ..कांटा फूल से कहता है, खफा यूं न हो, सरिता शर्मा ने ..ये सुना है कि वो हर सिक्त नजर, सीतावती ने ..अज इक गल, राजेंद्र कौशल ने ..देशवासियों मत भूलदे अपणी संस्कृति जैसी काव्य रचनाएं पेश कर खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में अशोक कालिया, डा भक्त वत्सल शर्मा, ओपी शांत, प्रो खुशी राम, बनवारी लाल पाठक, प्रेम भाटिया और केके लद्दाखी ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस मौके पर जिला भाषा अधिकारी त्रिलोक सूर्यवंशी ने कहा कि वे ऊना जिले में एक वर्ष से अधिक समय तक रहे। इस अवधि में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है और यहां की संस्कृति से भी वे रूबरू हुए।

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