
भुंतर (कुल्लू)। गड़सा घाटी के पुलिया नाले में बादल फटने के कारण आई बाढ़ से लोगों में दहशत है। बादल फटने के बाद पुलिया नाले का रौद्र रूप देखकर लोगों ने रात खौफ के साये में गुजारी।
रात जिस वक्त नाले में उफान आया तो साथ लगते भेडूकोट में बन रही एनएचपीसी की टनल में करीब 70 लोग काम कर रहे थे। इसके अलावा पास ही एनएचपीसी की टनल का कार्य कर रही कोस्टल कंपनी की कालोनी में करीब 80 लोग विश्राम कर रहे थे। इनमें से कुछ कर्मी अपनी शिफ्ट पूरी करके लौट चुके थे और कुछ कामगार अपनी शिफ्ट पर जाने वाले थे। कंपनी के बतौर सिक्योरिटी गार्ड तैनात गुप्त राम और गुड्डू ने बताया कि रात करीब 1.20 बजे जोरदार आवाज हुई। इससे सभी सहम गए और कंपनी के शेडाें में विश्राम कर रहे सभी लोगों को पहाड़ी पर बने शेड में ले गए। बाढ़ का यह तांडव करीब डेढ़ घंटे तक चलता रहा। इसके बाद नाले का उफान कुछ कम हुआ। बड़ी-बड़ी चट्टानें के आपस में टकराकर भयानक आवाजें पैदा कर रही थीं। इसके आग की चिंगारियां भी निकल रही थीं। उन्होंने बताया कि बाढ़ का पानी कंपनी द्वारा बनाई गई कालोनी में भी घुस गया। लेकिन तीन-चार बड़ी चट्टानों के यहां आने के कारण बाढ़ का रुख दूसरी ओर मुड़ गया। इस कारण जानमाल की कोई क्षति नहीं हुई। यदि पानी कालोनी की तरफ मुड़ गया होता तो भारी क्षति हो सकती थी। एनएचपीसी के जीएम और कोस्टल कंपनी के जीएम एचके शर्मा ने बताया कि बाढ़ के कारण टनल का निर्माण रोक दिया है। करीब 20 दिन बाद कार्य शुरू होने की संभावना है।
47 की जान ले चुका पुलिया नाला
भुंतर (कुल्लू)। पुलिया नाले में 2004 में बादल फटने के कारण बाढ़ आई थी। इस बाढ़ में करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ था। जानकारी के अनुसार 2004 में पुलिया नाले में आई बाढ़ के कारण एक कंपनी के 47 मजदूरों की जान चली गई थी। इसके अलावा करोड़ों रुपये की मशीनरी भी बाढ़ की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गई थी।
