
रामपुर बुशहर। प्रदेश में निजी स्कूलों के बच्चों को खेलकूद में आगे लाने की शिक्षा विभाग की मुहिम रंग लाती नजर नहीं आ रही है। खंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में खेलना अनिवार्य किए जाने के बावजूद निजी स्कूल दूरियां बनाए हुए हैं। इससे सरकारी एवं निजी स्कूलों के बच्चों के बीच आपसी तालमेल बिठाने की कोशिशें भी बेकार होती नजर आ रही हैं।
प्रदेश में निजी एवं सरकारी स्कूलों की अलग-अलग प्रतियोगिताएं होती थीं, लेकिन इस बार प्रदेश में निजी एवं सरकारी स्कूलों की प्रतियोगिताएं इकट्ठे कराने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग इसके बारे में हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी निजी स्कूलों को आदेश जारी कर चुका है। आदेशों में निजी स्कूलों के लिए खंड स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेना अनिवार्य किया गया है, लेकिन हाल ही में आयोजित जगह-जगह हुई खंड स्तरीय प्रतियोगिताओं पर नजर दौड़ाएं तो निजी स्कूल दूरियां बनाते ही नजर आए हैं। सराहन खंड की खंड स्तरीय प्रतियोगिता में निजी स्कूलों की संख्या एक, रामपुर ब्लाक की प्रतियोगिता में तीन, कुसुम्पटी में सात और कुमारसैन ब्लॉक की प्रतियोगिता में दो स्कूलों ने उपस्थिति दर्ज कराई। जबकि, इन ब्लॉकों में निजी स्कूलों की संख्या इससे कहीं अधिक है। शिमला ब्लॉक की खंड स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में तो छात्र वर्ग में एक भी स्कूल खेलने नहीं आया है।
एडीपीओ शिमला रूपेश्वर भारद्वाज ने कहा कि निजी स्कूलों के बच्चों को खेलों में आगे लाने और सरकारी एवं निजी स्कूलों के बच्चों के बीच आपसी तालमेल बिठाने के लिए यह कदम उठाया गया था। सात जुलाई तक पूरे शिमला जिले में खंड स्तरीय प्रतियोगिताओं का समापन होना है। सभी ब्लॉकों में निजी स्कूलों की भागेदारी कम रहने पर अगला कदम उठाया जाएगा।
