
नई दिल्ली, (राकेश त्यागी): नोएडा के अवैध खनन में खलल का नतीजा ट्रैनी आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित होकर भुगतना पड़ा। उधर, ग्रेटर नोएडा मै तैनात एसडीएम पद से हटने के बाद खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से ठप पड़ी है। खनन माफिया बैखौफ होकर रात के अंधरे में अपने काम को अंजाम दे रहे है। नागपाल ने खनन माफियाओं को गिरफ्त में लेकर उनके ट्रक-डम्पर सील किए। उन पर जुर्माना ठोककर प्रदेश का राजस्व बढ़ाया। बीते माह सिर्फ जुलाई में ही दुर्गा ने अवैध रेत से भरे दर्जनों ट्रकों को जब्त किया था।
धर-पकड़ पर एक नजर
4 जुलाई नोएडा के सेक्टर 39 में दो ट्रक।
12 जुलाई को सेक्टर 49 से पांच गाडिय़ां।
15 जुलाई को सेक्टर 39 में एक ट्रक।
16 जुलाई को नोएडा के सेक्टर 20, सेक्टर 39, फेज 2 में पांच ट्रक।
17 जुलाई को ग्रेटर नोएडा के कासना, एछर, नोएडा के सेक्टर 39 में चार ट्रक।
18 जुलाई को दुर्गा नागपाल ने अवैध रेत से भरी 15 गाडिय़ां पकड़ी।
24 जुलाई को ग्रेटर नोएडा के कासना और रबुपुरा इलाके से 10 गाडिय़ां पकड़ी।
दुर्गा की इन कार्रवाइयों से रेत माफि या में खलबली मच गई थी। 27 जुलाई की आधी रात को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। ऐसे में उन्हें बतौर इनाम की बजाय अखिलेश की सरकार ने उन्हें सजा दी। यहां सवाल उठता है कि अखिलेश सरकार की हठधर्मिता क्या आने वाले 2014 के लोकसभा चुनाव में नौकरशाहों को अपने साथ ला पाएगी। शायद नहीं, इससे नौकरशाह को भी सबक लेना चाहिए कि वे जनप्रतिनिधियों की चापुलूसी बंद करें। यह मलाईदार पोस्ट पर जाने की चाह का नतीजा है। देश की सर्वश्रेठ सेवा को प्राप्त आईएएस अधिकारी अपने पद की गरिमा को ताक पर रखकर जनप्रतिनिधियों के जूते तक साफ करने में कोई हिचकिचाहट नहीं रखते।
वरिष्ठ आईएएस अफसरों की माने तो पद की गरिमा को बनाए रखने वाले और काम करने वाले अधिकारी की हमेशा पूछ होती है। जब तक दुर्गा नागपाल रहीं तब तक खनन माफि याओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी और उनको हटाए जाते ही कार्रवाई ठप हो गई। दुर्गा जब तक यहां एसडीएम के पद पर रही उन्होंने हार नहीं मानी। दुर्गा की कार्रवाईयों ने रेत माफि या की नाक में नकेल कस दिया था। पूरा देश दुर्गा के निलंबन पर सवाल उठा रहा है। इन सवालों के बीच दूसरी तरफ रेत माफि या का काम चालू है। रेत ट्रकों में भर कर लगातार ले जाया जा रहा है। कोई रोकने वाला नहीं है। कोई टोकने वाला नहीं है। कानून का कोई खौफ नहीं है। लेकिन जब दुर्गा थी तो स्थिति कुछ और थी।
